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Holi 2023- इस बार गोबर के गुलाल से खेलेंगे होली, नाम होगा ‘गोमय गुलाल’

बिना रंगों के होली के त्यौहार को पूरा नहीं माना जा सकता। पुराने ज़माने में फूलों के रंग का इस्तेमाल होली खेलने में होता था,लेकिन वक़्त बदला और कैमिकल से बने रंग मार्केट में आ गए लेकिन पिछले कुछ समय से कैमिकल से बने रंगों की वजह से होने वाले नुकसान से बचने के लिए एक बार फिर लोग ईको फ्रेंडली रंगो की तरफ रुचि दिखाने लगे हैं।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Mar 02, 2023

Rakhi Hajela
बिना रंगों के होली के त्यौहार को पूरा नहीं माना जा सकता। पुराने ज़माने में फूलों के रंग का इस्तेमाल होली खेलने में होता था,लेकिन वक़्त बदला और कैमिकल से बने रंग मार्केट में आ गए लेकिन पिछले कुछ समय से कैमिकल से बने रंगों की वजह से होने वाले नुकसान से बचने के लिए एक बार फिर लोग ईको फ्रेंडली रंगो की तरफ रुचि दिखाने लगे हैं। इस होली में आपको कई हर्बल गुलाल मिल जायेंगे, इस बार अगर कोई आपको फूलों से बने हर्बल गुलाल की जगह गोबर से बने गुलाल से रंग लगाए तो चौंकना नहीं, क्योंकि राजधानी जयपुर में गोबर से गुलाल यानी गोमय गुलाल बनाई जा रही है। इन रंगों से आपको डरने की भी जरूरत नहीं है। इसे खासतौर पर गोबर,अरारोट और नेचुरल कलर्स यानी सूखे फूलों से बनाया जा रहा है।
सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का प्रयास
शहर के एक युवक संजय छाबडा ने इस बार होली पर स्वास्थ्य को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचाने वाले अलग तरह से रंगों को इजाद किया है। इन्होंने गोबर से गुलाल बनाया है। संजय के मुताबिक, यह गुलाल पूरी तरह ऑर्गेनिक होने के साथ ही हेल्थ के लिए 100 प्रतिशत सुरक्षित है। गुलाल को बनाने के लिए गोबर को बिल्कुल महीन पीसकर उसका पाउडर बनाया गया है। इसके बाद इसमें अरारोट और खाने के रंगों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें खुशबू के लिए भी बिल्कुल प्राकृतिक तरीका अपनाया गया है, जिसमें फूलों की सुगंध मिलाई गई है। हालांकि गोबर की दुर्गंध को हटाने के लिए सबसे पहले इसे धूप में सुखाया गया है, इसके बाद ही गुलाल बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया है।

निशुल्क कर रहे वि तरित
संजय राजधानी के केशवपुरा गांव के 60 परिवार यह गुलाल बनवा रहे हैं। इससे इन परिवारों को रोजगार मिल रहा है। और तो और संजय इस गुलाल का निशुल्क वितरण कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस गुलाल में कई प्रकार के औषधीय गुण होते है। इसमें एंटी रेडिएशन और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह सुगंधित है और त्व्चा को ठंडकता देता है। बालों की सफाई, धुलाई करती है।

बेसहारा गोवंश को मिलेगा संरक्षण
संजय ने कहा कि देखने में आता है कि दूध देने में असमर्थ होने पर अक्सर पशुपालक गायों को बेसहारा छोड़ देते हैं। यदि गोमय उत्पाद की डिमांड बढ़ेगी तो इनके गोमूत्र और गोबर की महत्ता से ही इनका संरक्षण होने लगेगा। यह रोजगार का भी बेहतरीन जरिया है। केशवपुरा में यह गुलाल बनाने वाले 60 परिवारों को भी आर्थिक संबल मिल सकेगा।
दर्जनों उत्पाद हो रहे तैयार
संजय गोबर से गुलाल के अलावा भी कई प्रकार के उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इसमें विभिन्न प्रकार की मूर्तियां, टाइल्स, घड़ी, नेम प्लेट, की-रिंग, गोबर की राखी आदि शामिल हैं।