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होलिकोत्सव परवान पर : ठुमरी के साथ खूब जमी कथक की जुगलबंदी

जयपुर. आराध्य गोविंददेवजी के मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय होलिकोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को भक्ति के माहौल के बीच फाल्गुनी रंगों की बयार बही। कार्यक्रम में 150 से अधिक गायक-कलाकारों ने फाल्गुनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। फाल्गुनी भजन और गीतों पर भगवान कृष्ण और राधा के स्वरूप धरे कलाकारों सहित अन्य […]

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जयपुर. आराध्य गोविंददेवजी के मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय होलिकोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को भक्ति के माहौल के बीच फाल्गुनी रंगों की बयार बही। कार्यक्रम में 150 से अधिक गायक-कलाकारों ने फाल्गुनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। फाल्गुनी भजन और गीतों पर भगवान कृष्ण और राधा के स्वरूप धरे कलाकारों सहित अन्य कलाकारों ने मनोहारी नृत्य कर दर्शकों को देर तक बांधे रखा। पं. जगदीश शर्मा ने भजन ‘म्हारा प्यारा गजानन आई जो जी…” गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। गायिका परवीन मिर्जा ने ‘मत डालो रंग गुलाल ‘गाकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिशाल कायम की। संजय रायजादा ने ‘श्याम रंग में रंगी चुनरिया…’ भजन गाकर माहौल को भक्ति के शिखर पर पहुंचा दिया। तुषार शर्मा और नेहा शर्मा ने म्हारी चूनर छै जरकारी…. और ‘गोविन्दा प्यारा होरी…’ गीत गाकर अपने गायन की छाप छोड़ी।

भक्तिभाव से किया कीर्तन

आलोक भट्ट ने ‘जय राधा रमण हरि बोल…’ भजन के माध्यम से गोविंद के भक्तों से कीर्तन करवाया। तुमरी’होली आई रे पिया तोर…’ सुनाकर प्रियतमा की प्रियतम से होली खेलने की इच्छा को स्वर दिया। कुंज बिहारी जाजू ने ढूंढाड़ी भाषा में ‘म्हे तो थां से ही होली खेलां म्हारा गोविंद रसिया…’ सुनाकर भक्त की भगवान से अरदास का शाब्दिक चित्रण किया।