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Holi Festival : होली का डांडा रोपा, निभाई वर्षों पुरानी लोक परंपरा

प्राचीन परंपरा के अनुसार होली से एक माह पूर्व रोपे जाने वाला होली का डांडा माघ मास की पूर्णिमा पर बुधवार शाम को राजधानी में रोपा गया।

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जयपुर. फाल्गुन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा गुरुवार से फाल्गुन मास की शुरुआत हो गई है। अब एक महीने तक राजधानी में फाल्गुनी बयार बहेगी। इससे पूर्व प्राचीन परंपरा के अनुसार होली से एक माह पूर्व रोपे जाने वाला होली का डांडा माघ मास की पूर्णिमा पर बुधवार शाम को राजधानी में रोपा गया। इस मौके पर मंदिरों में झांकियां सजाई गई। अब ऋतु परिवर्तन के साथ ही देवालयों में भगवान के भोग पहनावे में भी धीरे-धीरे बदलाव होगा। ठाकुरजी को ठंडी तासीर के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। गेविंददेवजी मंदिर में महंत अंजन गोस्वामी के सान्निध्य में मानस गोस्वामी, सरस निकुंज के पीठाधीश्वर अलबेलों माधुरी शरण, प्रवीण को भैया, ज्योतिषाचार्य विनोद शास्त्री पंडित व महंत अमित शर्मा सहित अन्य संत-महतो ने भगवान गणपति और भक्त प्रहलाद का पूजन कर होली का डांडा रोपा। पं विजय शंकर पांडेय ने बताया कि गौड विप्र लोकगीत मंडल के कलाकारों ने फाग के गीतों से फिजा में फाल्गुनी रंग भर दिए।