
गुढ़ाचंद्रजी. करौली जिले की सीमा पर तालचिड़ा गांव में अरावली पर्वतमालाओं की गोद में स्थित प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। सावन के महीने में रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर में श्रद्धालु दूध और जल से शिवलिंग का अभिषेक करने के साथ रुद्राभिषेक भी कर रहे हैं।
प्राकृतिक और शांत वातावरण में स्थित यह मंदिर धार्मिक स्थल होने के साथ पर्यटन स्थल के रूप में भी लोगों को आकर्षित करता है। यहां श्रद्धालुओं के साथ पर्यटक भी प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंचते हैं। बताया जाता है कि करीब 200 वर्ष पहले घनी पहाड़ियों के जंगल में एक ग्वाले को भगवान भोलेनाथ के स्वरूप के दर्शन हुए थे। इसके बाद से यहां शिवलिंग विराजमान है।
सावन के महीने में मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। शिवरात्रि पर भी यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बुजुर्गों के अनुसार मंदिर परिसर में कई संतों ने वर्षों तक तपस्या की है। मंदिर में करीब 30 वर्ष से अखंड ज्योति प्रज्वलित है।
वनखंडेश्वर महादेव को दांतेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के प्रति करौली जिले के अलावा दौसा, सवाई माधोपुर, अलवर और भरतपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों में भी गहरी आस्था है।
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गुढ़ाचंद्रजी। तालचिड़ा गांव की पहाड़ियों में विराजमान वनखंडेश्वर महादेव मंदिर।
Updated on:
10 Aug 2026 06:01 am
Published on:
10 Aug 2026 06:01 am
