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मानव—घोड़े का रिश्ता है सदियों पुराना

पुष्कर पशु मेला होता है घोड़ों की बिक्री का सबसे बड़ा केन्द्रइस बार शामिल होंगे अजमेर, राजसमंद और धौलपुर के अश्व

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जयपुर

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Ajay Sharma

Sep 27, 2018

jaipur

मानव—घोड़े का रिश्ता है सदियों पुराना

जयपुर. घोड़े को मानव का सबसे पुराना और वफादार साथी माना जाता है। विशेषज्ञों का का मत है कि करीब 7000 वर्ष पूर्व रूस के पास आर्यों ने प्रथम बार घोड़े को पाला। माना जाता है कि आर्य ने ही घोड़े को पालतू बनाया, जो फिर एशिया से यूरोप, मिस्र और शनै:शनै: अमरीका आदि देशों में फैला। संसार के इतिहास में घोड़े पर लिखी गई प्रथम पुस्तक शालिहोत्र शास्त्र मानी जाती है, जिसे ऋषि ने शालिहोत्र ने लिखा। श्रीकष्ण राजा नल और पांडवो में नकुल अश्वविद्या के विशेषज्ञ माने जाते थे। उन्होने भी शालिहोत्र शास्त्र पर पुस्तकें लिखी थी। भारत में घोड़े को घर का सदस्य माना जाता है। महाराणा प्रताप का चेतक घोड़ा तो विश्व विख्यात है। हमारे यहां अजमेर, राजसमंद और धौलपुर के अश्व बेहतरीन माने जाते है।

पुष्कर पशु मेले मे अजमेर, राजसमंद और धौलपुर के घोड़ों का रास्ता साफ हो गया है। खास बात यह है कि इसमें इस बार सरकार ने हरी झंडी देते हुए इसी महीने जारी की अधिसूचना में तीनों जिलों को ग्लेण्डर्स मुक्त क्षेत्र घोषित किया। जिससे इन पशुओं के आवागमन, पशु बाजार, हाट मेले, प्रदर्शनी की रोक भी हटा दी गई। पिछले साल रोग की वजह से पुष्कर मेेले में घोड़ों के प्रवेश पर रोक थीं। यहां हर साल लगभग आठ से दस हजार घोड़ो की बिक्री और खरीद होती है। मेले एवं प्रदर्शनी में पशुपालन विभाग ने अश्व वंशीय पशुओं की ग्लैण्डर्स वैद्य सीरो- नेगेटिव रिपोर्ट लाना भी आवश्यक कर दिया है। रोक हटने से इन जिलो से अश्व पालक परबतसर, मेड़ता, भरतपुर, पुष्कर, नागौर, झालरापाटन और गोगामेड़ी पशु मेलो में रौनक देखने को मिलेगी।

शादी समारोह में बना रहा भय

ग्लेण्डर्स अश्व वंशीय पशुओं में होने वाला एक संक्रामक रोग है। इसका कारक बर्कहोल्डेरिया मेलियाई जीवाणु है। जिसमें पशु के फेफड़ो एवं अन्य अंगो में पानी आना, त्वचा एवं श्वसन अंगो मेें छाले होना, गले, पेट में गांठ हो जाती है। इस रोग की आशंका पशुओ के साथ अश्वपालको एवं अन्य संपर्क में आने वाले व्यक्ति में भी होती है। इसके कारण लोगों में शादी-समारोह में भी भय का माहौल देखने को मिला। गणना के अनुसार प्रदेश में अश्व प्रजाति की संख्या लगभग एक लाख २२ हजार है।

वर्जन

तीनों जिलो में कोई नवीन रोग प्रकोप चिन्हित नहीं हुआ। अश्वों के नमूनों की सीरो-नेगेटिव परिणाम प्राप्त हुए। ऐसे में सम्पूर्ण क्षेत्र को ग्लैण्डर्स रोग के परिपेक्ष्य में रोग मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। यहां लगी रोक भी हटा दी गई है। प्रदेश में सघन सर्वेक्षण कार्यक्रम जारी है। - डॉ. भवानी सिंह राठौड़, अतिरिक्त निदेशक(स्वास्थ्य) पशुपालन विभाग