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Explainer : सूरज के कितने करीब पहुंचे हैं अब तक के सोलर मिशन, कितने रहे कामयाब

(Solar Mission) अब तक का सबसे सफल मिशन नासा का जेनेसिस को माना जाता है, जो 2001 में लॉन्च किया गया था। यह सौर हवाओं (solar winds) का सैंपल लेकर पृथ्वी पर लौटते वक्त क्रैश लैंड (crash land) हो गया था। हालांकि इसके टुकड़ों से कुछ सैंपल वैज्ञानिकों ने हासिल किए थे।

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Explainer : सूरज के कितने करीब पहुंचे हैं अब तक के सोलर मिशन, कितने रहे कामयाब

नासा का जेनेसिस 2001 में लॉन्च किया गया था

जयपुर. भारत का सौर मिशन आदित्य एल-1 शनिवार को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया गया। भारत से पहले अन्य देश भी सूर्य का अध्ययन करने के लिए मिशन भेज चुके हैं, हालांकि इनमें ज्यादातर कक्षा में पहुंचे, लेकिन सफलता दर ज्यादा नहीं कही जा सकती। जानिए अब तक सोलर मिशन के बारे में-

कितने देश भेज चुके हैं सोलर मिशन
भारत से पहले दुनिया की तीन देश या अंतरिक्ष एजेंसियां सोलर मिशन भेज चुकी हैं। इनमें अमरीका, जर्मनी और यूरोपीय स्पेस एजेंसी शामिल हैं। सबसे पहला मिशन पायनियर-5 अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 1960 में भेजा था

किस देश के कितने प्रयास
अमरीका अब तक 14 मिशन भेज चुका है, इनमें 12 ऑर्बिटर सूर्य के चारों ओर अलग-अलग कक्षाओं में चक्कर लगाते हुए अपना कार्य कर रहे हैं। जर्मनी नासा के सहयोग से अब तक दो सोलर मिशन हेलियोस-एस वहेलियोस-बी भेज चुका है। पहला 1974 और दूसरा 1976 में। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) भी चार मिशन भेज चुका, जिसमें उलिसस सीरीज के तीन नासा के सहयोग से भेजे हैं। इसने पहला मिशन 1996 में भेजा था। जबकि 2021 में सोहो नाम से स्वतंत्र मिशन भेजा, जो अभी रास्ते में है।

कितने सफल, कितने विफल
अब तक भेजे गए करीब 20 सूर्य मिशन में ज्यादातर को सफल ही माना गया है। 1969 में नासा की ओर से भेजा गया पायनियर-ई एकमात्र विफल माना जाता है, जो सूर्य की कक्षा में नहीं पहुंच पाया। यूरोपीय एजेंसी का 2008 में भेजा गया उलिसस-3 को मिलाजुला सफल माना जाता है। बैटरी खत्म होने के कारण इसका संपर्क टूट गया था। अब तक का सबसे सफल मिशन नासा का जेनेसिस को माना जाता है, जो 2001 में लॉन्च किया गया था। यह सौर हवाओं का सैंपल लेकर पृथ्वी पर लौटते वक्त क्रैश लैंड हो गया था। हालांकि इसके टुकड़ों से कुछ सैंपल वैज्ञानिकों ने हासिल किए थे।

सूर्य के कितने करीब पहुंचे
नासा का कहना है, 2018 में भेजा उसका ‘पार्कर सोलर’ सूर्य के सबसे निकट पहुंचा है। यह तीन वर्ष बाद सूर्य के ऊपरी वायुमंडल से होकर गुजरा, जिसे कोरोना कहते हैं। नासा का दावा है कि यह सूर्य की सतह से 65 लाख किमी के दायरे में पहुंचा है, जहां 1377 डिग्री सेल्सियस तापमान है। यह सात लाख किमी प्रति घंटे की गति से सूर्य का चक्कर लगा रहा है। मिशन ने वहां आवेशित कणों के नमूने लिए और सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र की जानकारी जुटाई। इसी तरह यूरोपियन स्पेस एजेंसी का 9 फरवरी, 2020 में भेजा गया सोलर ऑर्बिटर 30 मार्च 2022 को सूर्य के सबसे निकट गया। एजेंसी ने इसका वीडियो भी जारी किया था।

सूर्य के बारे में कुछ रोचक तथ्य
सूर्य 4.5 अरब वर्ष पुराना हाइड्रोजन और हीलियम से युक्त चमकता हुआ गैसीय गोला है। इसकी सतह पृथ्वी की तरह ठोस नहीं है।
-पृथ्वी से सूर्य की दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है। यह सौरमंडल का सबसे बड़ा तारा है।
-इसका आयतन 13 लाख पृथ्वी के बराबर है।
-सूर्य का अधिकतम तापमान इसके केंद्र में है, जहां 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस बताया जाता है।
-पृथ्वी पर इसकी किरणें पहुंचने में सात मिनट का समय लगता है।