
जयपुर। जयपुर में बढ़ती सर्दी को देखते हुए नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में वन्यजीवों की सुरक्षा और देखभाल के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सीनियर वाइल्डलाइफ चिकित्सक डॉ अरविंद माथुर ने जानकारी दी है कि गिरते तापमान और बढ़ते कोहरे को देखते हुए वन विभाग ने इन उपायों को लागू किया है।
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शेर, बाघ, तेंदुआ, स्लॉथ बीयर और अन्य जंगली जानवरों के लिए उनके रात्रि आश्रयों को विशेष रूप से तैयार किया गया है। इन आश्रयों में हीटर लगाए गए हैं ताकि ठंड के प्रभाव को कम किया जा सके। साथ ही, आश्रयों को मोटे पर्दों से ढक दिया गया है ताकि ठंडी हवा अंदर न जा सके और वन्यजीव आरामदायक माहौल में रह सकें।
सर्दियों के मौसम में वन्य जीवों की ऊर्जा और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए उनके आहार में बदलाव किया गया है। स्लॉथ बीयर को नियमित आहार के साथ-साथ शहद और खजूर दिया जा रहा है, तो वहीं शेर, बाघ और तेंदुए जैसे मांसाहारी जानवरों को अंडे, विटामिन और मिनरल्स के साथ अतिरिक्त पोषक तत्व दिए जा रहे हैं।
सर्दी और कोहरे के प्रभाव से वन्यजीवों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर न हो, इसके लिए विशेष दवाएं दी जा रही हैं। वन्यजीवों को इम्यूनिटी बूस्टर दवाएं दी जा रही हैं ताकि वे ठंड के प्रभाव से बच सकें। ऐसे ही जानवरों को तनाव मुक्त रखने के लिए एंटी-स्ट्रेस मेडिसिन का भी उपयोग किया जा रहा है।
वन विभाग ने सुनिश्चित किया है कि ठंड के कारण किसी भी वन्य जीव के स्वास्थ्य पर बुरा असर न पड़े। वन विभाग ने सर्दियों में संभावित स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि आने वाले दिनों में ठंड और कोहरा और बढ़ने की संभावना है। इसके लिए सभी वन्यजीवों की नियमित निगरानी की जा रही है।
पार्क प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि वन्यजीवों को ठंड से बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। वन विभाग का प्रयास है कि इन इंतजामों के जरिए नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रहने वाले वन्यजीव सुरक्षित और स्वस्थ रहें।
वन विभाग ने पार्क में आने वाले पर्यटकों से अपील की है कि वे वन्यजीवों को लेकर सतर्क रहें और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करें।
इस सर्दी के मौसम में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जो कदम उठाए हैं, वे अन्य बायोलॉजिकल पार्कों के लिए भी एक प्रेरणा हैं। वन्यजीवों की देखभाल और संरक्षण के लिए ऐसे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं।
Updated on:
31 Dec 2024 12:32 pm
Published on:
31 Dec 2024 12:31 pm
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