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17 साल में रोडवेज के जितने डूबे, 4 साल में उससे ज्यादा का लगा फटका

600 करोड़ रुपए के घाटे की अजब कहानी 2,100 करोड़ रुपए का घाटा 1997-2013 तक 2500 करोड़ रुपए का घाटा 2014-2018 तक 1169 करोड़ रुपए का सर्वाधिक घाटा 2016-2017 तक

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Jaipur

17 साल में रोडवेज के जितने डूबे, 4 साल में उससे ज्यादा का लगा फटका

विजय शर्मा . जयपुर. राजस्थान रोडवेज के हजारों कर्मचारी हड़ताल पर चल रहे हैं, वहीं 4600 करोड़ रुपए के घाटे से जूझ रही रोडवेज की किसी को ïिफक्र ही नहीं है। रोडवेज के अफसर इस पर बात करने को तैयार नहीं है, जबकि कर्मचारी नेता सरकार द्वारा निजीकरण को बढ़ावा देने को जिम्मेदार बता रहे हैं। बड़ी बात यह है कि रोडवेज के प्रबंध निदेशक तक को घाटे की पूरी जानकारी नहीं है।
रोडवेज का 54 साल पहले गठन कर सरकारी विभाग बनाया गया। इसके बाद एक अक्टूबर 1964 को इसे निगम बना दिया। वर्ष 1964-1996 तक रोडवेज घाटे में नहीं रही, वर्ष 1997-98 से इसके घाटे में जाने की शुरुआत हुई और करीब 24 करोड़ का घाटा रोडवेज को लगा। 21 साल बाद अब रोडवेज 4600 करोड़ रुपए के घाटे में है। खास बात यह है कि रोडवेज ने वर्ष 1997-98 से वर्ष 2013-14 तक 2100 करोड़, वहीं पिछले 2014 से 2018 तक 2500 करोड़ का घाटा उठाया है।
72 दिन चली सबसे लंबी हड़ताल
रोडवेज ने इस तरह की हड़ताल पहली बार नहीं हुई। 1990 में करीब 72 दिन रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल रही। इससे रोडवेज की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा था। वहीं 1997 में राज्य की तत्कालीन सरकार ने रोडवेज बसों का किराया 30 फीसदी बढ़ा दिया। कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया। हालांकि बाद में सरकार ने कुछ किराया घटा दिया। इसके चलते उस समय रोडवेज बसों के यात्री निजी बसों की ओर चले गए। तब से रोडवेज लगातार घाटे में जाने लगी।


घाटे के लिए कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर लगाए ये आरोप

ऐसे हुआ साल-दर-साल घाटा (करोड़ों रुपए में)
वर्ष घाटा
1997— 98 23.99
1998— 99 44.01
1999—00 73.79
2000—01 85.61
2001—02 62.91
2002—03 42.29
2003—04 37.62
2004—05 4.63
2005—06 30.08
2006—07 19.14
2007—08 23.57
2008—09 189.33
2009—10 78.95
2010—11 185.00
2011—12 130.60
2012—13 648.41
2013—14 487.86
2014—15 628.48
2015—16 702.61
2016—17 1169.76
2017—18 28.35

जिम्मेदारों का कहना
मुझे रोडवेज के घाटे की पूरी जानकारी नहीं है। कौन से साल में कितना घाटा हुआ इसलिए कुछ कह नहीं सकता।
सांवरमल वर्मा, एमडी, राजस्थान रोडवेज
भाजपा सरकार ने रोडवेज विरोधी नीतियां लागू कर दी। प्राइवेट बसों के रूट खोल दिए। 1500 लोक परिवहन बसें चला दी। रोडवेज को 5 साल में महज 500 बसें दी। इससे सबसे ज्यादा घाटा बीते 4 साल में हुआ।
एम.एल. यादव, प्रदेश अध्यक्ष राजस्थान रोडवेज एम्पलाइज यूनियन एटक