
AI Image
ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद के त्योहार को लेकर देश भर के पशु बाजारों और बकरा मंडियों में इन दिनों मवेशियों की खरीद-फरोख्त का काम बेहद तेजी से चल रहा है। राजस्थान के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में पशुपालक और छोटे व्यापारी अपने बेहतरीन नस्ल के बकरे और बकरियों को लेकर अच्छे मुनाफे की उम्मीद में पड़ोसी राज्यों जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की मंडियों का रुख करते हैं। इसी सिलसिले में राजस्थान से गुजरात के सूरत शहर की बकरा मंडी में व्यापार करने पहुंचे एक राजस्थानी मवेशी पालक भंवरलाल जयदेव भागरिया के साथ सूरत में नकली नोटों के जरिए ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सूरत शहर के पुलिस महकमे से प्राप्त आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, राजस्थान के रहने वाले फरियादी भंवरलाल जयदेव भागरिया पिछले दिनों अपने मवेशियों को बेचने के लिए सूरत की स्थानीय बकरा मंडी में आए हुए थे। त्योहार का सीजन होने के कारण मंडी में काफी चहल-पहल थी। इसी दौरान तीन स्थानीय युवक भंवरलाल के पास आए और उनकी दो बकरियों को खरीदने के लिए सौदा तय करने लगे।
सूरत पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) सुनील तारडी ने पूरे मामले का आधिकारिक ब्यौरा देते हुए मीडिया को बताया कि राजस्थान के मूल निवासी भंवरलाल जयदेव भागरिया अपनी बकरियों के साथ मंडी में मौजूद थे। उसी समय तीन खरीदार उनके पास पहुंचे और काफी मोल-भाव करने के बाद दोनों पक्षों के बीच बकरियों का सौदा पक्का हो गया।
व्यापारिक बातचीत के दौरान दोनों बकरियों की कुल कीमत 50000 रुपये निर्धारित की गई थी, जिसके तहत प्रत्येक बकरी का मूल्य 25000 रुपये तय हुआ था। सौदा तय होने के बाद तीनों आरोपियों ने भंवरलाल को 50000 रुपये की नकद राशि थमा दी और दोनों बकरियों को अपने साथ लेकर चले गए। उस समय मंडी की व्यस्तता और भीड़भाड़ के कारण भंवरलाल नोटों की सघन जांच नहीं कर पाए थे और उन्होंने पैसों को अपने पास सुरक्षित रख लिया था।
वारदात का सबसे मुख्य पहलू अगले दिन सुबह सामने आया जब राजस्थान के इस ग्रामीण पशुपालक ने अपने पूरे दिन की कमाई और नोटों की गड्डी को गिनना व संभालना शुरू किया। भंवरलाल ने जब 50000 रुपये के उन नोटों को ध्यान से देखा, तो उन्हें उन नोटों के कागज की गुणवत्ता, छपाई और सुरक्षा धागे को लेकर गहरा संदेह हुआ।
उन्हें महसूस हो गया कि बकरियों के बदले उन्हें जो नोट दिए गए हैं, उनमें से कई नोट पूरी तरह से नकली और जाली हैं। गुजरात जैसे अनजान राज्य में अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी को देखकर भंवरलाल घबराए नहीं, बल्कि उन्होंने एक जागरूक नागरिक का परिचय दिया। उन्होंने बिना कोई समय गंवाए तुरंत सूरत की स्थानीय पुलिस से संपर्क किया और अपने साथ हुई इस पूरी जालसाजी की लिखित शिकायत दर्ज करवाई।
राजस्थान के पशुपालक की शिकायत को सूरत पुलिस ने बेहद गंभीरता से लिया। एसीपी सुनील तारडी के सुपरविजन में तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया गया और बकरा मंडी व उसके आसपास के रास्तों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले गए। पीड़ित भंवरलाल द्वारा दिए गए हुलिए और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जालसाज गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को धर दबोचा।
सूरत पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान इस प्रकार की गई है:
मोहम्मद उल्फत आलम शेख: इस जाली नोट गिरोह का सक्रिय सदस्य जो मंडी में रेकी करने का काम कर रहा था।
नाजिर अंसारी: नकली नोटों की खेप को बाजार में खपाने और सीधे-साधे ग्रामीण व्यापारियों को निशाना बनाने में शामिल आरोपी।
मोहम्मद रईस सिद्दीकी: वारदात के समय मौके पर मौजूद और वित्तीय हेर-फेर करने वाला तीसरा मुख्य शातिर।
पुलिस ने इन तीनों आरोपियों को पकड़ने के साथ ही उनके कब्जे से वारदात से जुड़ा सारा माल और साक्ष्य शत-प्रतिशत बरामद कर लिया है। पुलिस टीम ने आरोपियों के पास से उस बुलेट मोटरसाइकिल को भी जब्त कर लिया है, जिससे वे बकरा मंडी में जाली करेंसी खपाने के लिए आए थे।
इसके अतिरिक्त, आरोपियों के पास से विभिन्न कंपनियों के 4 आधुनिक मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं। पुलिस इन मोबाइलों के कॉल रिकॉर्ड्स, व्हाट्सएप चैट्स और डेटा की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन आरोपियों के तार किसी बड़े अंतर-राज्यीय नकली नोट छापने वाले गिरोह से तो नहीं जुड़े हैं।
सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि राजस्थान के पीड़ित पशुपालक भंवरलाल की मेहनत से पाली गई दोनों बकरियों को भी पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पूरी तरह सुरक्षित बरामद कर लिया है।
इस तथ्यात्मक घटना ने राजस्थान के उन हजारों पशुपालकों और किसानों के सामने एक बड़ा सुरक्षा सवाल खड़ा कर दिया है जो हर साल देश की विभिन्न बड़ी मंडियों में अपने मवेशी बेचने जाते हैं। चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हमारे किसान और पशुपालक बेहद सीधे होते हैं और वे आधुनिक नकली नोटों की पहचान करने में सक्षम नहीं होते, इसलिए वे अक्सर ऐसे अपराधियों के आसान शिकार बन जाते हैं।
कृषि और पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार, मरुधरा के व्यापारियों को बाहरी राज्यों में व्यापार करते समय निम्नलिखित व्यावहारिक सावधानियां अवश्य बरतनी चाहिए:
डिजिटल पेमेंट को प्राथमिकता: जहां तक संभव हो, बड़े सौदों (जैसे 10000 रुपये से अधिक) के लिए सीधे बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर या यूपीआई (UPI) के माध्यम से भुगतान स्वीकार करें।
बैंक या स्थानीय व्यापारियों की मदद: यदि नकद भुगतान लेना बेहद मजबूरी हो, तो नोटों को मंडी के किसी अधिकृत काउंटर, पेट्रोल पंप या नजदीकी बैंक में ले जाकर उनकी प्रामाणिकता की जांच करवा लें।
अंधेरे या जल्दबाजी में सौदा करने से बचें: अक्सर अपराधी शाम के समय या कम रोशनी का फायदा उठाकर जाली नोट चलाने की कोशिश करते हैं, इसलिए दिन के उजाले में ही पैसों का पूरा लेन-देन निपटाएं।
Published on:
27 May 2026 10:22 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
