
राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में नई सीईटीपी योजना लागू। पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण और भू-जल को जहरीला होने से बचाने के लिए नई कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) योजना लागू की गई है। इसके तहत रीको और गैर-रीको औद्योगिक क्षेत्रों में सीईटीपी का निर्माण होगा। इस पर 150 करोड़ रुपए तक अनुदान दिया जाएगा। खास यह है कि नए प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक पर आधारित होंगे, जिससे ट्रीटेड पानी का दोबारा उपयोग किया जा सकेगा।
साथ ही पुरानी सीईटीपी योजना का दायरा बढ़ाकर अनुदान सीमा 100 करोड़ रुपए कर दी गई है। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए रीको और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल वित्तीय सहायता देंगे। वहीं, गैर-रीको औद्योगिक क्षेत्रों में सहायता राज्य सरकार और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल स्तर पर दी जाएगी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने गाइडलाइन भी जारी कर दी है।
ज्यादातर औद्योगिक इकाइयों में फिलहाल अपशिष्ट जल का निस्तारण ईटीपी या क्लस्टर आधारित सीईटीपी के जरिए किया जा रहा है, लेकिन ज्यादातर में ट्रीटेड पानी का दोबारा उपयोग नहीं हो पा रहा है। अब जीरो लिक्विड डिस्चार्ज से पानी को शुद्ध कर दोबारा उद्योगों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
सरकार ने सीईटीपी स्थापना से जुड़ी पुरानी योजना का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब इस योजना में परियोजना लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 75 करोड़ रुपए की जगह 100 करोड़ रुपए तक अनुदान मिलेगा। पहली बार गैर-रीको औद्योगिक क्षेत्रों को भी इसका लाभ देने का फैसला किया गया है। राजस्थान में नई कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट योजना से भू-जल प्रदूषण पर रोक लगेगी। साथ ही पानी की बचत होगी। इस योजना से निवेश के साथ ही उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
-परियोजना लागत का 80 प्रतिशत तक अनुदान
-अधिकतम 150 करोड़ रुपए की सहायता
-औद्योगिक इकाइयों को केवल 20 प्रतिशत खर्च उठाना होगा
1. पाली : टेक्सटाइल और डाइंग इकाइयों का रासायनिक पानी समस्या बना हुआ।
2. बालोतरा : डाइंग-प्रिंटिंग इकाइयों से निकलने वाले रसायनों से भू-जल प्रभावित।
3. भीलवाड़ा : बड़ी संख्या में टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिट संचालित।
4. जोधपुर : बासनी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल बड़ी चुनौती।
5. जयपुर : बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग, केमिकल और प्रोसेसिंग इकाइयां संचालित, औद्योगिक अपशिष्ट जल के सुरक्षित निस्तारण की चुनौती लगातार बढ़ रही।
6. अलवर-भिवाड़ी : ऑटोमोबाइल, केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों का बड़ा क्लस्टर।
Updated on:
27 May 2026 09:37 am
Published on:
27 May 2026 09:32 am
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