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मैं पौंड्रिक हवेली…उस सुबह की साक्षी हूं, जब नई राजधानी ले रही थी आकर

हवेली परिसर में दो दिन पहले तोड़फोड़ शुरू हुई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पता किया तो मामला हवेली के बेचने का सामने आया। तोडफ़ोड़ के विरोध में लोगों ने निगम में शिकायत की। निगम ने गार्ड लगा दिया।

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जयुपर। मैं जयपुर की उस सुबह की साक्षी हूं, जब सपनों की एक नई राजधानी आकार ले रही थी। जन्म के साथ ही मेरे आंगन में वैदिक मंत्रों की ध्वनि गूंजती थी और शाही रथों की आहट सुनाई देती थी। मुझे जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह ने अपने राजकीय पुरोहित रत्नाकर भट्ट के लिए बनवाया था, जिन्हें उन्होंने पौंड्रिक की पदवी दी थी। मैंने देखा है…शाही दरबार की गरिमा, होली के रंग, गणगौर की शोभायात्राएं और सेना के प्रस्थान के दृश्य। मेरी दीवारों पर उकेरे गए भित्ति चित्र आज भी उन पलों को सहेजे हुए हैं। कभी मेरे कक्षों में ज्योतिष, साधना और यज्ञ की चर्चाएं होती थीं। जयपुर को बसाने के धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज मेरे आंगन में भी सुनाई देती थी।
मुझे याद है वह गर्व का समय, जब ब्रह्मपुरी में मेरा निर्माण हुआ और मैं एक सम्मानित ठिकाना बनी। तालकटोरा के सामने बना पौंड्रिक उद्यान भी मेरे स्वामी की स्मृति में था। मैं सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं थी, बल्कि परंपरा, आस्था और इतिहास की जीवित धडकऩ थी। लेकिन, आज मैं अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रही हूं। दो दिनों से मेरे अस्तित्व पर हथौड़े चल रहे हैं। कहा जाता है कि मैं संरक्षित श्रेणी में हूं और मुझे तोड़ा नहीं जा सकता। फिर भी मेरी दीवारें कांप रही हैं।

मैंने तीन सदियां देखी हैं, समय की आंधियां झेली हैं। क्या मैं अब अपने ही शहर में असहाय होकर ढह जाऊंगी? मैं पूछती हूं क्या जयपुर मुझे यूं ही मिट जाने देगा, या मेरी सांसें बचाने कोई आगे आएगा?

दो दिन से तोडफ़ोड़…निगम ने रुकवाया, गार्ड लगाया
हवेली परिसर में दो दिन पहले तोड़ फोड शुरू हुई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पता किया तो मामला हवेली के बेचने का सामने आया। तोडफ़ोड़ के विरोध में लोगों ने निगम में शिकायत की। निगम ने गार्ड लगा दिया। अगले दिन उसे हटा भी दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक दखल के चलते ऐसा किया गया है। जिन लोगों ने हवेली खरीदी है, वे सीधे कुछ भी कहने से बच रहे हैं। पिछले दो दिन से राजधानी के परकोटा क्षेत्र में हवेली चर्चा का विषय बनी हुई है।

जोन उपायुक्त ने पत्र में लिखा
हवामहल-आमेर जोन कार्यालय की ओर से गार्ड लगाने के लिए सतर्कता शाखा को पत्र लिखा गया। इसमें लिखा है कि यह ऐतिहासिक धरोहर और हैरिटेज हवेली है। जिसे बिना स्वीकृति के तुड़वाया जा रहा है। हैरिटेज नियमों के विरुद्ध है। शिकायतें मिलने पर काम बंद कर दिवा दिया है। आगे काम न चले, इसके लिए गार्ड लगाएं।

उक्त हवेली संरक्षित सूची में शामिल है। यदि इसे ध्वस्त किया जा रहा है तो गलत है। नियमों के तहत बिल्डिंग बॉयलाज के अनुरूप हवेली का जीर्णोद्धार किया जा सकता है। विस्तार करने का भी प्रावधान है, उसमें मूल स्वरूप को नहीं छेड़ सकते।
-शशिकांत, अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक, नगर निगम

इतिहास के झरोखे से
इतिहास के जानकारों की मानें तो जयपुर संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह ने हवेली का निर्माण अपने राजकीय पुरोहित रत्नाकर भट्ट के निवास के लिए किया गया था। वे ज्योतिष और तंत्र विद्या में निपुण थे।तालकटोरा के सामने पौंड्रिक उद्यान का निर्माण भी महाराजा ने करवाया था। बताया जाता है कि महाराजा रत्नाकर को काशी से लेकर आए थे। यहां लाकर पौंड्रिक को राजगुरु बनाया।

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