
एआई से बनाई गई तस्वीर
मनीष चतुर्वेदी
जयपुर। राजस्थान में कैंसर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के मौके पर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। राजस्थान में हर साल 20 से 30 हजार नए बच्चों में कैंसर की पहचान हो रही है। इनमें से 10 फीसदी से ज्यादा बच्चों की मौत हो जाती है। यानी हर साल करीब तीन हजार तक की संख्या में बच्चे कैंसर की वजह से दम तोड़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर पहचान और सही इलाज से कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है, लेकिन लापरवाही और सही डाटा की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भगवान महावीर कैंसर चिकित्सालय की डॉ. शिवानी माथुर ने बताया कि हर साल 20 से 30 हजार बच्चों में कैंसर की पुष्टि हो रही है। असल आंकड़ा इससे ज्यादा भी हो सकता है, क्योंकि सभी अस्पताल अपना पूरा डाटा साझा नहीं कर रहे हैं। कैंसर पीड़ित बच्चों में से करीब 10 फीसदी से अधिक बच्चों की मौत हो जाती है। इस हिसाब से हर साल राजस्थान में करीब तीन हजार बच्चे कैंसर की वजह से जान गंवा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि देर से पहचान, इलाज में देरी और इलाज की सुविधा दूर होने की वजह से कई मामलों में हालत गंभीर हो जाती है।
राजस्थान में बच्चों में सबसे ज्यादा ब्लड कैंसर यानी ल्यूकेमिया के मामले सामने आते हैं। इसके बाद ब्रेन ट्यूमर, लिंफोमा, किडनी कैंसर, आंखों का कैंसर और हड्डियों के कैंसर के केस मिलते हैं। भगवान महावीर कैंसर चिकित्सालय की डॉ. शिवानी माथुर के अनुसार बच्चों में होने वाले कैंसर वयस्कों से अलग होते हैं। ये तेजी से बढ़ते हैं और इनके इलाज के लिए खास तरह की चिकित्सा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत होती है।
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के पास बच्चों के कैंसर का पूरा रेकॉर्ड नहीं पहुंच रहा है। प्रदेश में कई सरकारी और निजी अस्पताल कैंसर का इलाज कर रहे हैं, लेकिन सभी जगहों से रजिस्टर्ड डाटा साझा नहीं हो रहा। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के अधीक्षक डॉ. संदीप जसूजा का दावा है कि वैसे तो लगभग डाटा पूरा है। लेकिन कई अस्पताल अभी भी डाटा नहीं दे रहें है।
बच्चों में कैंसर होने का कोई एक कारण तय नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे आनुवंशिक कारण, पर्यावरणीय कारण जैसे प्रदूषण, रेडिएशन और जहरीले रसायनों का संपर्क जिम्मेदार हो सकता है। कुछ मामलों में बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चों में कैंसर के लक्षण आम बीमारियों जैसे लग सकते हैं। लंबे समय तक बुखार रहना, बहुत ज्यादा थकान, अचानक वजन कम होना, हड्डियों या जोड़ों में दर्द, बार-बार संक्रमण होना, शरीर पर गांठ या सूजन दिखना, आंखों की रोशनी में कमी या आंखों में सफेद चमक दिखना इसके संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और सही इलाज मिलने पर 80 फीसदी से ज्यादा मामलों में बच्चों को ठीक किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि माता-पिता लक्षणों को नजरअंदाज न करें, समय पर जांच कराएं और इलाज पूरा कराएं। सरकार और अस्पतालों को भी बच्चों के कैंसर का पूरा डाटा इकट्ठा कर इलाज की सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।
Updated on:
15 Feb 2026 12:07 pm
Published on:
15 Feb 2026 12:07 pm
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