25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आपको पहले भी बाहर निकाल चुका, फिर निकाल दूंगा: जोशी

विधानसभा अध्यक्ष ने सीएम सलाहकार लोढ़ा से कहा

2 min read
Google source verification
आपको पहले भी बाहर निकाल चुका, फिर निकाल दूंगा: जोशी

आपको पहले भी बाहर निकाल चुका, फिर निकाल दूंगा: जोशी

जयपुर. स्थानीय युवाओं को भर्तियों में प्राथमिकता देने से जुड़े सवाल पर प्रश्नकाल के दौरान मंगलवार को सीएम सलाहकार विधायक संयम लोढ़ा अध्यक्ष सी.पी. जोशी की मंजूरी के बिना ही बोलने लगे तो अध्यक्ष जोशी नाराज हो गए। लोढ़ा ने कहा कि मंत्री पिछले पांच साल से सिर्फ बातें ही कर रहे हैं। किया कुछ नहीं है। इस पर जोशी ने लोढ़ा को बैठने को कहा, लेकिन वे बोलते रहे। जोशी ने लोढ़ा को सदन से बाहर करने तक की चेतावनी दे दी।जोशी ने लोढ़ा से कहा कि मैं आपको आखिरी बार चेतावनी दे रहा हूं। आप इतने सीनियर हैं। आप गलत परंपरा डाल रहे हैं। आप श्रेष्ठ विधायक रहे हैं। अच्छे विधायक के बारे में जो निर्णय किया है, उसे रिव्यू करना पड़ेगा। मैं इस आचरण को बर्दाश्त नहीं कर सकता। लोढ़ा फिर भी बोलते रहे तो जोशी ने कहा कि आखिरी सदन चल रहा है। मैं आपको बाहर कर दूंगा। आपको पहले भी बाहर निकाला जा चुका है, मैं फिर ऐसा कर सकता हूं।

मंत्री बोले: प्रदेश की भर्तियों में स्थानीय को वरीयता नहीं मिलेगी

शिक्षा मंत्री बी.डी. कल्ला ने जिला स्तर पर भर्तियां करने और स्थानीय निवासियों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने का प्रावधान करने से साफ इनकार कर दिया है। भाजपा विधायक समाराम गरासिया के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि जिला स्तरीय मेरिट बनाने और स्थानीय प्रत्याशी को वरीयता दिए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 16 (2) के अनुसार स्थानीय निवास के आधार पर सरकारी नौकरियों में वरीयता नहीं दी जा सकती है।

अध्यक्ष ने कहा संभावना तलाशें

मंत्री कल्ला के जवाब पर अध्यक्ष जोशी ने दखल देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया था। उससे आगे भी सोचने की जरूरत है। पहले भी भर्तियां जिला स्तर पर ही होती आई है। मंत्री ने कहा कि पुलिस की भर्ती जिला स्तर से होती है, लेकिन उसमें लोकल को प्राथमिकता नहीं मिलती। किसी भी जिले का प्रत्याशी आवेदन कर सकता है, लेकिन मेरिट में आने पर ही होता है। उसको प्राथमिकता नहीं दी जाती है। अध्यक्ष ने कहा कि कानून कौन बनाता है? यह विधानसभा कानून बनाने के लिए ही है। कानून बनाने के संबंध में हम चर्चा नहीं करेंगे तो कौन करेगा? इस संबंध में सरकार को निश्चित तौर पर वापस निर्णय करना चाहिए कि क्या हम जिला लेवल पर भर्तियां कर सकते हैं? राजस्थान में जिला लेवल पर भर्तियां होती थीं। शिक्षकों की भर्ती जिला परिषद करती थीं और भर्तियां भी होती थीं। केवल एक उदाहरण के कारण पूरी व्यवस्था को बदल दिया, इसमें फिर से विचार करने की जरूरत है। दूसरे राज्यों का भी पता लगा करना चाहिए। कई जिलों में शिक्षक, मेडिकल कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते, माइग्रेट करने की स्थिति बन रही है। राजस्थान में हर क्षेत्र की अलग-अलग बोली है, बोली के आधार पर कोई क्राइटेरिया तय करके स्थानीय लोगों को लगाया जा सकता है।