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IAS संदीप वर्मा ने JDA Chairman शांति धारीवाल के अधिकार पर उठाए गंभीर सवाल…पढें और देखें

Minister Shanti Dhariwal v/s IAS Sandeep Verma

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IAS संदीप वर्मा ने JDA Chairman शांति धारीवाल के अधिकार पर उठाए गंभीर सवाल...पढें और देखें

IAS संदीप वर्मा ने JDA Chairman शांति धारीवाल के अधिकार पर उठाए गंभीर सवाल...पढें और देखें

भवनेश गुप्ता
जयपुर। वरिष्ठ आईएएस संदीप वर्मा ने मंत्री शांति धारीवाल (बतौर जेडीए अध्यक्ष) के अधिकार क्षेत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने धारीवाल के 15 अप्रेल 2019 के उस आदेश पर सवाल उठाए हैं, जिसमें जेडीए एक्ट का उल्लंघन हो रहा है। जयपुर विकास आयुक्त को भेजे पत्र में वर्मा ने यहां तक लिख दिया कि— ऐसा लग रहा है कि जेडीए अध्यक्ष जेडीए की समितियों के अघोषित अध्यक्ष बन गए हैं। जेडीए की कार्यसमिति व अन्य समितियों की बैठक की कार्यवाही विवरण को जारी करने से पहले ही जेडीए अध्यक्ष द्वारा संशोधित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह जेडीए एक्ट की धारा 4 का उल्लंघन है। यदि अध्यक्ष समिति के निर्णय से सहमत नहीं है तो उस स्थिति में भी संशोधन तब ही कर सकते हैं, जब कार्यवाही विवरण जारी हो चुका हो, लेकिन उससे पहले नहीं।

दरअसल, जेडीए की कार्यकारी समिति की बैठक 21 फरवरी को हुई थी। राजस्थान रोडवेज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संदीप वर्मा बतौर समिति सदस्य पहुंचे और आधे से ज्यादा एजेंडों पर आपत्ति जताते हुए अफसरों को कठघरे में खड़ा कर दिया। इसके बाद जेडीसी को पत्र भेजकर इन आपत्तियों को याद दिलाया। इस स्थिति से अफसरशाही से लेकर नेताओं में खलबली मची है। मंत्री शांति धारीवाल जयपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं। उन्होंने जेडीए आयुक्त गौरव गोयल को पत्र लिखकर उनकी टिप्पणियां बैठक के मिनिट्स में शामिल करने को कहा है

जेडीए अध्यक्ष धारीवाल के 15 अप्रेल 2019 को जारी आदेश के बिन्दु व उस पर आईएएस संदीप वर्मा की आपत्ति..

1. आदेश : 20 लाख से ज्यादा राशि के सभी प्रोजेक्ट, स्कीम का अनुमोदन (कार्यादेश जारी होने से पहले) अध्यक्ष से कराया जाए।
आपत्ति : जेडीए एक्ट की धारा 7 (2)(5) के अनुसार कार्यकारी समिति को ही प्रोजेक्ट, स्कीम के टेंडर स्वीकृत या निरस्त करने का अधिकार है। जेडीए अध्यक्ष के पास समिति के फैसलों को संशोधित करने का अधिकार तो है, लेकिन कार्यकारी समिति के निर्णय के बाद। जेडीए अधिकारी सीधे अध्यक्ष से अनुमोदन करा रहे हैं। अध्यक्ष को कार्यकारी समिति की शक्तियों को बायपास करते हुए टेंडर स्वीकृत या अस्वीकृत करने का अधिकार नहीं है।

2. आदेश : जेडीए की सभी समितियों के निर्णय की प्रति कार्यवाही विवरण जारी होने से 3 दिन के भीतर अध्यक्ष को भेजी जाए। तब तक इन निर्णयों को लागू नहीं किया जाए।
आपत्ति : कार्यसमिति व अन्य समितियों की बैठक के कार्यवाही विवरण जारी होने से पहले ही उसमें संशोधन करने का प्रयास किया जा रहा है। यह जेडीए एक्ट की धाराओं का स्पष्ट उल्लंघन है। जबकि, समिति में निर्णय होने और उसके कार्यवाही विवरण जारी होने के बाद ही संशोधन का अधिकार है।

पत्र में दो बिन्दुओं पर खींचा खाका
जिस आदेश का रोडवेज सीएमडी संदीप वर्मा ने अपने पत्र में हवाला दिया है, वह मंत्री शांति धारीवाल ने बतौर जेडीए अध्यक्ष 15 अप्रैल 2019 को जारी किया था। इसमें कुल 6 बिन्दु है। बिन्दु संख्या 1 व 3 को जेडीए एक्ट के विपरीत बताया।

एजेंडे और काम पर भी उठाए सवाल
वर्मा ने कार्यकारी समिति में पेश किए गए 50 एजेंडे में से आधे पर सवाल खड़े किए और कईयों में राजस्थान ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योरमेंट (आरटीपीपी) एक्ट का उल्लंघन होने का दावा किया।

1. 50 लाख का फायदा पहुंचाया : ट्रेफिक सिग्नल फ्री प्रोजेक्ट के तहत लक्ष्मी मंदिर तिराहे और बी-2 बायपास पर अण्डरपास, ओवरब्रिज बनने हैं। इसके लिए हुए टेंडर में एक कंपनी एआरएसएस ने भी बिड की लेकिन फिर वापिस ले ली। जेडीए ने उस पर पेनल्टी नहीं लगाई। जबकि, आरटीटीपी एक्ट के तहत पेनल्टी लगनी थी।इससे कंपनी को 50 लाख रुपए का फायदा पहुंचा।
2. स्मार्ट सिटी : राजभवन में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 8 करोड़ रुपए की लागत से विकास व सौन्दर्यन के काम हो रहे हैं। वर्मा का कहना था कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में आम जनता से जुड़े कार्य प्राथमिकता से करने चाहिए। राजभवन में किए जा रहे कार्य का आम जनता को कोई स्पष्ट फायदा होता नजर नहीं आ रहा। जेडीए यह काम कर रहा है।