
जयपुर. मिलेट मैन और पद्मश्री डॉ. खादर वली ने कहा कि जेन-जी को फास्ट फूड हम ही बना कर दे रहे हैं। पानीपुरी, मसालापुरी, पिज्जा मिलेट्स से बनाए जाएं तो युवा खुद जुड़ेंगे। मिलेट्स से टेस्टी फूड भी बना सकते हैं, चटपटा बना सकते है। यह फूड युवाओं को दीजिए, छह महीने में बदलाव नजर आएगा। सोमवार को राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने यह बात कही।
सवाल : युवाओं-बच्चों को मिलेट्स की ओर कैसे आकर्षित करें ?
जवाब : जेन-जी को फास्टफूड हम ही बना कर दे रहे हैं। पानीपुरी, मसालापुरी, पिज्जा मिलेट्स से बनाए जाएं तो युवा खुद जुड़ेंगे। इससे टेस्टी और चटपटा फूड भी बना सकते हैं। यह फूड युवाओं को दीजिए, छह महीने में बदलाव नजर आएगा।
सवाल : इस काम की शुरुआत कैसे की ?
जवाब : मैं अमरीका में था, तब 15 साल की एक बच्ची की परेशानी ने मुझे इसकी ओर मोड़ दिया। हमारा खाना ही बीमारियों का मूल कारण है। आहार सही हो जाए तो दवाइयों की जरूरत ही नहीं पड़े।
सवाल : खाद्य सुरक्षा योजना और पोषाहार में पर्याप्त पोषण है?
जवाब : पौष्टिक आहार भी मिलेट्स से बेहतर नहीं है। खाद्य सुरक्षा योजना और पोषाहार को लेकर नीतियां बनाने वाले मिलेट्स पर ध्यान नहीं दे रहे। इस पर गंभीर शोध नहीं हो रहे। हर राज्य अपने अनाज को पोषक बता रहा है, लेकिन वैज्ञानिक तुलना का अभाव है। मिलेट्स न्यूट्रिशन की बास्केट है। बाजरा बच्चों व गर्भवती माताओं के लिए अच्छा है।
सवाल : बाजार में मिल रहे फल-सब्जी कितने पौष्टिक हैं ?
जवाब : बाजार से लाने के बजाय स्वयं फल के पौधे लगाएं। उससे तैयार फल खाएं। हर परिवार एक फलदार पौधा लगाए। सब्जी को नींबू व इमली के पानी से शुद्ध कर खा सकते है।
सवाल : रोजमर्रा के खान-पान में मिलेट्स कैसे शामिल हो ?
जवाब : हम 80 साल से गेेहूं-चावल खा रहे हैं। वह सही खाना नहीं है। हम बीमारियों का स्वागत कर रहे हैं। मिलेट्स को लेकर जागरूकता जरूरी है। महिलाओं व लोगों के साथ बच्चों को भी जागरूक करना होगा। पहले 125 मिलेट्स थे। अब कांगनी, छोटी कांगनी, सान्वा, कोदा, कुटकी, बाजरा, रागी, ज्वार जैसे 10 ही मिलेट्स बचे हैं।
Updated on:
13 Jan 2026 12:35 pm
Published on:
13 Jan 2026 12:35 pm
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