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प्रदेश के इन 90 कॉलेजों में ही शुरू होंगे इग्नू के कोर्स और यहां डीपीसी के बाद भी खाली रह गए पद

कॉलेज आयुक्तालय ने जारी की गाइड लाइन...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Sep 30, 2017

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जयपुर। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली के माध्यम से सरकारी कॉलेजों में शुरू किए जा रहे उद्यमिता एवं कौशल विकास के पाठृयक्रम अब प्रदेश के सिर्फ 90 कॉलेजों में ही शुरू हो सकेंगे। पहले इन्हें प्रदेशभर के कॉलेजों में शुरू करने की योजना थी, लेकिन सरकार को इतने विद्यार्थी ही नहीं मिले। अब आयुक्त कालेज शिक्षा ने हाल ही नई गाइड लाइन जारी की है।

इग्नू की ओर से शुरू किए जा रहे पाठयक्रम जुलाई 2017 बैच के लिए केवल उन्ही महाविद्यालयों में शुरू करने की अनुमति दी है, जिनमें विद्यार्थी 10 या इससे अधिक हैं। गौरतलब है कि पाठ्यक्रम को शुरू करने के लिए पूर्व में विद्यार्थी संख्या 20 निर्धारित की थी, जिसे अब घटाकर 10 किया गया है।

बढ़ाना होगा नामांकन
कॉलेज शिक्षा आयुक्त आशुतोष एटी पेडणेकर ने कॉलेज प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि जनवरी 2018 बैच के उद्यमिता एवं कौशल विकास के इन पाठयक्रमों में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करें। विद्यार्थियों की नामांकन वृद्धि के लिए प्रयास करें।

पाठ्यक्रम के लिए विद्यार्थियों की संख्या
10 से 19 तक 1 पाठ्यक्रम
20 से 29 तक 2
30 से 39 तक 3
40 से 49 तक 4
50 व अधिक पर 5 पाठ्यक्रम

डीपीसी से भी नहीं भरे रिक्त पद
जयपुर। तृतीय श्रेणी से द्वितीय श्रेणी अध्यापक पद पर अभी डीपीसी हुई, लेकिन डीपीसी के बाद भी पद खाली रह गए। अजमेर में हुई डीपीसी में 11 हजार 127 पद निर्धारित थे, लेकिन ये पूरे भरे ही नहीं जा सके। इनमें से 687 पद तो रिक्त ही रह गए। पद नहीं भरने का कारण बताया जा रहा है कि पांच साल का अनुभव रखने वाले इतने तृतीय श्रेणी के अध्यापक ही नहीं है। अब भी अधिकांश पद एससी और एसटी कोर्ट के रिक्त ही हैं।

अनुभव में राहत की मांग
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री महेन्द्र पांडे ने शासन सचिव शिक्षा को पत्र लिखकर अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक पद पद डीपीसी में अनुभव 3 वर्ष का करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा करने से स्कूलों में कक्षा 9 व 10 के पढ़ाने के लिए हिंदी, अंग्रेजी, तृतीय भाषा, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान के वरिष्ठ अध्यापक मिल सकेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार ने मई 2017 में ही आरईएसएसआर 1971 के नियम 6 डी में संशोधन कर पंचायत अध्यापकों को शिक्षा विभाग में लेने के लिए अनुभव 5 वर्ष से घटाकर तीन वर्ष किया है।