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सरिस्का बाघ अभयारण्य में अवैध कचरा डंपिंग: वन्यजीवों पर खतरा, प्रशासन ने शुरू की सख्त कार्रवाई

garbage dumping Sariska: माधोगढ़ पुलिया के पास रात में दो ट्रक कचरा डाला गया, बंदरों और अन्य जीवों को संक्रमण का डर। संबंधित नगर निकायों को जारी किए नोटिस

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Mar 21, 2026

Sariska Tiger Reserve: अलवर. राजस्थान के सरिस्का बाघ अभयारण्य क्षेत्र में पर्यावरण के प्रति लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। अलवर-जयपुर मार्ग पर माधोगढ़ पुलिया के पास सडक़ किनारे रात के अंधेरे में दो ट्रक भरकर अवैध रूप से कचरा डाला गया। यह कार्य गुपचुप तरीके से की गई, जो न केवल वन्यजीव संरक्षण कानूनों का सीधा उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रशासनिक असंवेदनशीलता को भी उजागर करता है।

प्रदूषक सामग्री से जीवों को संक्रमण

सरिस्का एक संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र है, जहां बाघ, तेंदुआ, सांभर, नीलगाय, चीतल और अन्य दुर्लभ वन्यजीव निवास करते हैं। सूत्रों के अनुसार, कचरा डंपिंग वाली जगह पर वन्यजीवों की नियमित आवाजाही रहती है, खासकर बंदरों की संख्या यहां बहुत ज्यादा है। प्लास्टिक, जैविक कचरा और अन्य प्रदूषक सामग्री से जीवों को संक्रमण, जहर या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढऩे का खतरा भी है, क्योंकि कचरा खोजने वाले जानवर गांवों या सडक़ों पर आ सकते हैं। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर लंबे समय तक नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसमें मिट्टी और पानी का प्रदूषण शामिल है।

संबंधित नगर निकाय को नोटिस

मामले की सूचना मिलते ही सरिस्का टाइगर रिजर्व प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। जांच शुरू कर दी गई है। सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है, ट्रक नंबरों की ट्रेसिंग की जा रही है और संबंधित नगर निकायों को नोटिस जारी किए गए हैं।

कचरे को तुरंत हटाने के निर्देश दिए

प्रशासन ने साफ कहा है कि दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों, ठेकेदारों या नगरपालिका अधिकारियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण कानून और अन्य प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। कचरे को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सरिस्का जैसे संरक्षित क्षेत्रों के आसपास शहरी निकायों को कचरा प्रबंधन में जिम्मेदारी बरतनी होगी। अवैध डंपिंग न सिर्फ जीवों की जान जोखिम में डालती है, बल्कि पर्यटन और जैव-विविधता को भी नुकसान पहुंचाती है। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने इसकी निंदा की है और स्थायी समाधान की मांग की है। प्रशासन की सख्ती से उम्मीद है कि ऐसे मामलों पर लगाम लगेगी और सरिस्का सुरक्षित रहेगा।