
फाइल फोटो
सुनील सिंह सिसोदिया/जयपुर। नदियों से बजरी का अवैध खनन करके माफिया हर दिन 21 करोड़ से ज्यादा का माल बेचता है। राज्य में अवैध बजरी खनन की अब तक हुई पड़ताल के मुताबिक मौटे तौर पर रोजाना 7 हजार ट्रक, ट्रोला, डम्पर और ट्रैक्टर-ट्रोली के जरिए बजरी बाजार में पहुंचती है। बजरी माफिया ही नहीं, बनास नदी के किनारे पर बसे कुछ गांवों के लोग भी इस धंधे में जुटे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की बजरी खनन पर रोक है, फिर भी राज्य सरकार ने नदियों के खजाने की लूट पर स्थायी रोक लगाने के बजाय महज 15 दिन के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। यह अभियान भी सिर्फ इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट की सेन्ट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) नदियों में बजरी की आवक और निकासी की जमीनी हकीकत जानने राज्य के दौरे पर आ रही है। दौरे के दौरान कमेटी को मौके पर अवैध खनन होता नहीं मिले, इसलिए यह अभियान शुरू किया गया। खान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जब बजरी पर रोक नहीं थी, उस दौरान 10 हजार से ज्यादा ट्रक-ट्रोले बजरी नदियों से खनन कर निकाली जा रही थी।
रोजाना 2.10 लाख टन अवैध खनन
बजरी अवैध रूप से ले जाने में ट्रैक्टर-ट्रोली, 10 चक्का, 12 चक्काऔर 22चक्का ट्रोले लगे हैं। एक वाहन में औसतन 30 टन बजरी भी मानी जाए तो रोजाना 2 लाख 10 हजार टन बजरी का अवैध खनन हो रहा है। एक टन की 1 हजार की दर भी मानी जाए तो 2 लाख 10 हजार टन बजरी का मूल्य 21 करोड़ रुपए होता है। पैसा, बजरी माफिया और मिलभगत वाले अफसरों की जेब में जा रहा है।
Published on:
11 Oct 2020 05:13 pm
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