
इमिटेशन ज्वैलरी का बढ़ा के्रज, रोज हो रही करीब 40 लाख की बिक्री
जयपुर. बढ़ती महंगाई और चोरी के ढर के चलते अब महिलाएं कृत्रिम या इमिटेशन ज्वैलरी खरीदने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। यही कारण है कि शहर के सबसे तेज बढ़ते उद्योगों में अब इमिटेशन ज्वैलरी का भी शुमार हो रहा है। चोर-लुटेरों से सोने को बचाने में ही नहीं बल्कि रोजगार देने में भी यह इंडस्ट्री आगे आ गई है। इस ज्वैलरी के क्रेज का ही नतीजा है कि 10 साल पहले जहां इसके 2 शोरूम हुआ करते थे, वहीं आज इनकी संख्या बढ़कर 40 हो गई है। इंडस्ट्री में लगे लोगों का कहना है कि चेन स्नैचिंग के बढ़ते मामलों से भी महिलाएं इस ज्वैलरी को तरजीह दे रही हैं। जौहरी बाजार इस ज्वैलरी के हब के रूप में सामने आया है, जहां 20 शोरूम हैं। इनमें कुंदन, पोलकी, पर्ल आदि के अलावा स्टील, एलुमिनियम और लोहे जैसी धातुओं का प्रयोग होता है।
सरकार दे सब्सिडी
कारोबारियों का कहना है कि बाजार में चीनी ज्वैलरी की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। इसकी फिनिशिंग हमारे उत्पाद से बेहतर है, 20 फीसदी तक सस्ती हैं। कारोबारियों का कहना है कि सरकार चीन और जापान की आधुनिक मशीनों पर कुछ सब्सिडी दे। आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर में 40 लाख रुपए की इमिटेशन ज्वैलरी रोज बिक रही है, जिनमें 5 रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक के हैं आइटम शामिल हैं। इस ज्वैलरी में देश में कुल कारोबार 8,000 करोड़ का है।
घरेलू उद्योग भी
इमिटेशन ज्वैलरी में लागत काफी कम होती है। इसका बेस मैटल की चेन होती है, जिस पर विभिन्न तरह की डिजाइन की जाती हैं। इसमें औजार भी सामान्य तरह के होते हैं, जो आसानी से उपलब्ध होते हैं। जयपुर में अनेक घरों में महिलाएं ये ज्वैलरी बनाकर सप्लाई करती हैं। सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मित्तल के अनुसार इमिटेशन ज्वैलरी के कारोबार में हर साल 30 फीसदी की वृद्धि हो रही है। सोना-चांदी की ज्वैलरी महंगी हो रही है, ऐसे में महिलाओं को इमिटेशन की चूडिय़ां, ईयर ङ्क्षरग्स, नेकलैस,चेन पसंद आ रही हैं। चोर भी इस ज्वैलरी पर नजर नहीं डालते हैं।
Published on:
17 Jul 2018 10:58 am
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