
बच्चे अपनी बात बिना किसी डर और झिझक के कह सकें, इसके लिए पुलिस थानों को 'बाल मैत्री आदर्श पुलिस थानोंÓ में तब्दील किया जाएगा। ये थाने ऐसे होंगे, जहां पर बच्चे खेल-खेल में अपनी परेशानी को बयां कर सकेंगे। थानों के भीतर ही बच्चों के लिए एक लाइब्रेरी होगी, जहां पर किस्से, कहानियों की किताबें होंगी। इसके अलावा खेल से जुड़े सामान भी थाने में रखे जाएंगे। बाल संरक्षण आयोग की पहल से इसकी शुरुआत प्रदेश के धौलपुर जिले से की गई है। यहां के सदर पोलिवे थाने का नाम बदलकर बाल मैत्री आदर्श पुलिस थाना सदर बनाया गया है। आयोग की मानें तो इस पहल का मकसद थानों में आने वाले मासूम बच्चों को अपनी बात रखने में भयमुक्त माहौल देना है, ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सके। इस काम में जिलों में काम करने वाली पंजीकृत संस्थाओं की मदद ली जाएगी। ये संस्थाएं संबंधित पुलिस अधिकारियों को जेजे एक्ट और बच्चों से जुड़े अन्य बाल अधिकारों के बारे में प्रशिक्षित करेंगी। क्या है 'बाल मैत्रीÓ केंद्र— बाल मैत्री पुलिस थाना की विशेषता यह है कि इसमें दीवारों पर बच्चों को सहज बनाने के लिए विभिन्न खेल खेलते बच्चों के पेंटिंग होंगी। बच्चों को खिलाने के लिए इनडोर गेम के भी सामान होंगे, जो बच्चों को तनाव से बाहर निकालने में मदद करेंगे। थाने के केंद्र में बच्चों को पढ़ाने के लिए बच्चों की कहानियों से जुड़ी किताबें होंगी, जिससे थाने में शिकायत लेकर आने वाले बच्चों को सहज माहौल मिले और वे अपनी समस्या आसानी से बता सके। बाल आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी का कहना है कि राज्य के सभी थानों में बाल मैत्री वातावरण बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। समय—समय पर इसकी समीक्षा भी की जाएगी। इसकी शुरुआत धौलपुर से की गई है। जल्द ही प्रदेश के सभी थानों में ये केंद्र होंगे।
Published on:
05 Apr 2018 01:58 pm
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