
devi temple at bagoriya
जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र के बागोरिया गांव के पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित माताजी का मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है। यहां तेरह पीढि़यों से एक सिंधी मुस्लिम परिवार पुजारी बनकर देवी मां की आराधना व सेवा कर रहा है।
कहा जाता है कि बागोरिया स्थित पहाड़ी पर माता अवतरित हुई थीं। भोपाजी के पूर्वज ने इससे जुड़ी कहानी बताई कि बहुत समय पहले उनके पूर्वज मालवा की ओर जा रहे थे। एक रात उनके सपने में देवी मां ने दर्शन कर कहा कि पहाड़ी पर बनी बावड़ी से मेरी मूर्ति निकली है, तुम उस मूर्ति की पूजा करो।
माता ने दिए दर्शन
वर्तमान में अस्सी वर्षीय बुजुर्ग जमालुदीन खां भोपाजी जमाल खांजी माता की सेवा कर रहे हैं। 500-600 साल पहले इनके पूर्वज ऊंटों के काफिले को लेकर मध्यप्रदेश के मालवा जा रहे थे। रात में पूर्वज के सपने में देवी मां ने दर्शन दिए और कहा कि तुम मेरी मूर्ति की पूजा करो। तभी से पीढ़ी दर पीढ़ी ये माता की सेवा में लगे हैं।
पूजा के साथ नमाज भी
यह परिवार हिन्दू धर्म- संस्कृति की पालना करते हुए पुजारी के रूप में भी तन, मन, धन से सेवा दे रहा है। परिवार के सभी लोग मंदिर जाने के साथ-साथ मस्जिद जाकर नमाज भी अदा करते हैं। मुस्लिम पुजारी ही यहां के क्षेत्रवासियों को हर प्रकार की पूजा-अर्चना करवाते हैं। गांव के लोगों में भी किसी तरह का बैर भाव नहीं है, वे भोपाजी को अपने पुजारी के रूप में सहर्ष स्वीकार कर चुके हैं।
परिवार से ही बनता है पुजारी
इस मंदिर में माता की पूजा जमाल खां के पुरखों के समय से हो रही है। जिसे वे आज भी निभा रहे हैं। जमाल खां कहते हैं कि मुख्य पुजारी हमारे परिवार से बनता है और मैं मेरे पिताजी के बाद पिछले करीब पचास साल से पुजारी के रूप में मंदिर में माता जी की सेवा करता आ रहा हूं।
Published on:
10 Apr 2016 05:46 pm
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