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राजस्थान के इस गांव में घरों पर ताले तो दूर मुख्य दरवाजे तक नहीं

अभी तक सुना था महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर (Shani Shingnapur) गांव में लोग घरों में दरवाजे (Doors in homes) तो दूर ताले भी नहीं लगाते (Don't even lock) हैं, लेकिन राजस्थान (Rajasthan) मांडलगढ़ (Mandalgarh) क्षेत्र की महुआ पंचायत का गांव सारण का खेड़ा, जहां लोगों को अपने घरों पर ताले लगाने की नौबत नहीं आती।

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जयपुर

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vinod saini

Oct 17, 2019

राजस्थान के इस गांव में घरों पर ताले तो दूर मुख्य दरवाजे तक नहीं

राजस्थान के इस गांव में घरों पर ताले तो दूर मुख्य दरवाजे तक नहीं

-भीलवाड़ा जिले के सारण का खेड़ा में 250 साल की परम्परा, कभी नहीं हुई चोरी

जयपुर/बीगोद (भीलवाड़ा)। अभी तक सुना था महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर (Shani Shingnapur) गांव में लोग घरों में दरवाजे (Doors in homes) तो दूर ताले भी नहीं लगाते (Don't even lock) हैं, लेकिन राजस्थान (Rajasthan) में भी ऐसा गांव है, जहां न चोरों का डर और न बदमाशों की फिक्र (Fear of thieves and not worry about miscreants)। मांडलगढ़ (Mandalgarh) क्षेत्र की महुआ पंचायत का गांव सारण का खेड़ा (Saran ka Kheda), जहां लोगों को अपने घरों पर ताले लगाने की नौबत नहीं आती। ताले तो छोड़ो, यहां तो लोग घरों के मुख्य दरवाजे तक नहीं रखते। ऐसा करीब 250 साल से हो रहा है। दिलचस्प यह भी है कि इसके बावजूद वर्षों से गांव में चोरी की वारदात नहीं हुई।
करीब 100 परिवारों के इस गांव के बड़े बुजुर्गों की मान्यता है कि मुख्य द्वार पर दरवाजा नहीं लगाने की परम्परा को जिस किसी ने तोडऩे की कोशिश की, उसके हालात बुरे हो गए। राजपूत समाज की बहुलता वाले इस गांव में बड़े व खूबसूरत मकान बने, लेकिन इनके मुख्य द्वार पर न दरवाजे हैं और न पालतू जानवरों को रोकने को लोहे के फाटक। हालांकि घरों में अंदर के कमरों में दरवाजे हैं। गांव के शंकर सिंह ने बताया कि पूर्वजों के अनुसार ढाई सौ साल पहले महात्मा भगवानदास गांव के नजदीक उवली नदी के किनारे शिव मंदिर में तपस्या करते थे। महात्मा ने अनवासा नीम का खेड़ा में जिंदा समाधि ली थी। उससे पहले उन्होंने लोगों से कहा था कि अपने मकानों के मुख्य द्वार पर दरवाजा मत लगाना। इससे गांव में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहेगी।

गांव पर महात्मा का आशीर्वाद
सारण का खेड़ा में दशकों से चोरी जैसी कोई वारदात नहीं हुई। गांव पर महात्मा का आशीर्वाद है।

- रणजीत सिंह शक्तावत, सरपंच महुआ

शनि शिंगणापुर में भी नहीं लगाते घरों के ताले

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा तालुका के पास बसे एक छोटे से गांव शनि शिंगणापुर में भी लोग घरों में ताले तो दूर दरवाजे भी नहीं लगाते। शिर्डी से 7 किलोमीटर दूर और मुंबई से 350 किलोमीटर की दूरी पर शनि शिंगणापुर बसा हुआ है, जो एक देव स्थान माना जाता है। शनि ग्रह से संबंधित शनि देव यहां के मुख्य देवता माने जाते हैं।

क्यों नहीं लगाए जाते हैं यहां घरों में ताले?
इस शहर में लोग शनिदेव की शक्ति पर अटूट विश्वास करते हैं। कहते हैं कि शनिदेव गलत काम करने वालों को सजा देते हैं और इसीलिए लोगों को यहां चोरी का डर नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे शहर में कोई पुलिस स्टेशन भी नहीं है। यहां के घरों के दरवाजे और खिड़कियां भी नहीं लगाई गई है। गोपनीयता के लिए लोगों ने घरों में पर्दे लगा रखे हैं। लोगों का मानना है कि उन्हें घर में दरवाजे बंद किए बिना छुट्टियों पर जाने में कोई परेशानी नहीं है। कभी भी यहां कोई भी कीमती सामान या आभूषण ताले में नहीं रखे जाते। कहा जाता है कि डकैती करने वालों को शनिदेव का प्रकोप झेलना होता है। इस विश्वास के साथ लोग अपना कीमती सामान खुला ही छोड़ देते हैं।

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