हर्षित जैन
जयपुर. भाई—बहन के प्रेम के प्रतीक सबसे बड़ा पर्व रक्षाबंधन बुधवार को मनाया जाएगा। पर्व पर राखियों से नवाचार का अंकुर फुंटने से पर्व की खुशियां भी दोगुनी होगी। गौसंरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही स्नेह के साथ गमलों में हरियाली खिलेगी। गोबर की राखियां न सिर्फ जयपुर बल्कि दूसरे राज्यों और सात समंदर पार अमरीका, आस्ट्रेलिया, कनाड़ा में भेजी गई है। स्वदेशी की धाक भी कायम होगी। इससे कई महिला स्वयंसहायता से जुड़ी महिलाओं को रोजगार भी मिला है। इकोफ्रेंडली राखियां सांगानेर, बस्सी, चाकसू, नायला की गोशालाओं में तैयार की है।

गौकृति जयपुर के संस्थापक भीमराज शर्मा ने बताया कि गोबर से बनी राखियों के कई फायदे हैं। डेकोरेशन के समय राखियों में बीज डाले जाते हैं। जमीन पर जाने के बाद गोबर खाद का काम करने के साथ ही पौधे खिलेंगे। पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। गौशाला प्रबंधनों को प्रशिक्षण भी दिया है। यूएसए, आस्ट्रेलिया में भी आर्डर गए हैं। खास राखी के लिए किट भी तैयार किया है। इसमें रोली चावल से लेकर मिश्री, ग्रीटिंग कार्ड शामिल किया है। गोबर की राखियों में 80 से अधिक डिजाइन हैं। कीमत 25 से लेकर 150 रुपए तक है। कोपर, ब्रॉस का भी इस्तेमाल किया है।

पीएम मोदी को भेजी है राखियां
नीमच के बंदीगृह स्थित गोपाल गुरु कमल गौशाला में गौकृति संस्थान जयपुर ने बंदियों से राखी का निर्माण करवाया। यहां तैयार राखियां पीएम नरेंद्र मोदी को भेजी गई है। जूट के धागे का विशेष तौर से इस्तेमाल किया है। मध्यप्रदेश के शिवराज सिंह चौहान, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए भी राखियां भेजी गई है। जयपुर में 22 गोदाम स्थित सुदर्शनपुरा में राखी बनाई है। राखी को सुंदर बनाने के लिए मोती, रंग, नगीने, मोली, स्टार्स आदि काम में लिए जाते हैं।

बनाई एक लाख राखियां
राखियों में औषधीय तुलसी, अश्वगंधा के साथ ही फलदार, छायादार पौधों के बीज डाले गए हैं। सांगानेर, प्रतापनगर, सीकर रोड सहित अन्य जगहों पर यह राखियां बिक्री के लिए उपलब्ध है। पिंजरापोल गोशाला के सनराइज आर्गेनिक पार्क में राष्ट्रीय ग्रामीण व शहरी आजीविका मिशन डे अंतर्गत हैनीमैन चेरिटेबल मिशन सोसायटी की ओर से महिलाओं को राखी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इससे आठ से दस हजार रुपए की आय भी अर्जित की है। संस्थापक अतुल गुप्ता ने बताया कि अमेरिका सहित अन्य राज्यों में भी इकोफ्रेंडली राखियां भेजी गई है। भारतीयों ने एसीएमएस के द्वारा राखी इंपोर्ट करने के ऑर्डर दो महीने पहले दे दिए थे। सबसे खास बात यह है कि जो राखियां बेच रहे हैं वह गैर भारतीय महिलाएं हैंं। केलिफॉर्नियां की मैली फ्री मेनेइलिक राखी बेच रही है। एक लाख से अधिक राखियां तैयार की है।

राखी को फेंके नहीं
सोसायटी की सचिव मोनिका गुप्ता ने बताया कि वोकल फाॅर लोकल अभियान के तहत गोबर और बीज से निर्मित यह राखियां कई मायनों में खास है। राखी को अपने घर में रखे गमले में गाड़ने के बाद राखी में बीज फुटकर पौधा बन जाएगा। ये पौधे न केवल घर व बगीचे की सुंदरता बढ़ाएंगे, बल्कि भाई-बहन के स्नेह की याद भी दिलाएंगे। गेंदा, अश्वगंधा, कालमेघ, तुलसी सहित अन्य पौधों के खिलने के बाद पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। राखी को फेंकने की बजाय गमले में या घर की बाड़ी में डाल सकतें है। सूखे गोबर के बारीक चूर्ण में हल्दी, चंदन, ग्वारफली का चूर्ण की से राखी तैयार हुई है।

खास-खास
-जयपुर की चार गोशालाओं में मिला 300 से अधिक महिलाओं को रोजगार
-एक दिन में तैयार की प्रति महिला ने 50 से अधिक राखियां
-एक किलो गोबर से बनती है 100 से अधिक राखियां
—चार लाख से अधिक राखियां की तैयार
-एक राखी की कीमत 10 से लेकर 40, 150 रुपए तक