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जयपुर की नीरू ने चावल के 55 दानों पर राष्ट्रगान और 101 दानों पर राष्ट्रगीत लिखकर जगाई देशभक्ति की अलख

आजादी का अमृत महोत्सव.. संविधान की परिभाषा के साथ ही बनाया तिरंगा

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rice grains art

जयपुर की नीरू ने चावल के 55 दानों पर राष्ट्रगान और 101 दानों पर राष्ट्रगीत लिखकर जगाई देशभक्ति की अलख

हर्षित जैन / जयपुर। चावल के दानों पर सूक्ष्म लेखन कला में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता राजधानी में टोंक रोड निवासी आर्टिस्ट नीरू छाबड़ा ने चावल के दानों पर आजादी के 75 वें अमृत महोत्सव की बधाई के साथ ही राष्ट्रगान लिखा है। चावल के दानों पर राष्ट्रगीत व संविधान की परिभाषा लिखकर उन्होंने अपनी प्रतिभा की अमिट छाप छोड़ी है। इस कला के जरिए वह पिछले 36 वर्ष से देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।

64 वर्षीय छाबड़ा ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना था कि कुछ अलग हटकर कला को देश दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाए। राष्ट्रगान जन-गण-मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लिखने में छह दिन का समय लगा। इस बार देश आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर आजादी के इस खास दिन को अलग रूप में मनाएगा।

ऐसे में कला के जरिए देश सेवा का मन बनाया। 74 प्रतीक के रूप में तिरंगे चावल लेकर इसके साथ पेंटिंग से एक तिरंगा बनाया। चावल के 55 दानों में राष्ट्रगान और 101 दानों पर राष्ट्रगीत लिखा और 286 दाने अन्य लेखन में काम में लिए।

यह उपलब्धि भी सराहनीय
चावल के दानों पर सूक्ष्म लेखन की कला के लिए छाबड़ा को देश प्रदेश सहित विदेशों में अनेक अवाॅर्ड, पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं। उनकी श्रेष्ठ कलाकृतियों मे मुख्य रूप से लोकतंत्र के पचास वर्ष, भक्तामर स्त्रोत, मेरा भारत महान, अनेकता में एकता, चावल के 700 दानों पर पर्यावरण के बारे में सूक्ष्म लेखकृति बनाई। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 72 अक्षर लिखा चावल देख पंजिका पुस्तिका में हस्ताक्षर किए। पीएम मोदी व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी उनकी कला की सराहना की है। उन्होंने बताया कि वह अपनी इस कला का प्रदर्शन जर्मनी सहित अन्य जगहों पर भी कर चुकी हैं।