
जयपुर से हैदराबाद जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर
रेलवे के यात्रियों को सफर में सीट पर गर्मागर्म खाना उपलब्ध कराने के दावे फीके साबित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि प्रदेश से दूसरे राज्यों के बीच संचालित होने वाली करीब एक दर्जन से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा ही नहीं है। जिससे लंबे सफर में यात्रियों को खाने-पीने की परेशानी से जूझना पड़ रहा है। वहीं बरसाती सीजन में यह बहुत ही परेशानी का सबब बन जाता है क्योंकि अधिकतर लोग बाहर का खाना नहीं खाते हैं। आश्चर्य की बात है कि जिम्मेदार इसे बिलकुल अनजान बने हुए हैं।
दरअसल, पश्चिम बंगाल के न्यूजलपाईगुड़ी से उदयपुर आने वाली ट्रेन 2232 किमी का सफर 43.50 घंटे में पूरा कर गंतव्य तक पहुंचती है। इसी प्रकार मनारगुड़ी-भगत की कोठी (जोधपुर) के लिए ट्रेन 42 रेलवे स्टेशनों पर ठहराव कर 2861 किमी की दूरी तय कर तीसरे दिन भगत की कोठी पहुंचती है। इस तरह खजुराहो-उदयपुर ट्रेन, जयपुर-पुणे टे्रन, इंदौर-जोधपुर ट्रेन, सूर्यनगरी ट्रेन समेत करीब एक दर्जन से अधिक ट्रेनें हैं जोकि 1 से 3 हजार किमी. की दूरी तय करती है। इससे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में दो से तीन दिन का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। इसके बावजूद भी रेलवे ने इस ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा बहाल नहीं की।
वसूल रहे मनमाने दाम
जिन ट्रेनों में कैटरिंग की सुविधा नहीं है। उनमें यात्री अवैध वैंडरों से मनमाने दाम में खाद्य सामग्री खरीदने को मजबूर है। 15 रुपए में बिकने वाली पानी की बोतल के भी 20 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्ग व महिलाओं को होती है। उन्हें खाने पीने का सामान लेने के लिए ट्रेन से उतरने चढ़ने में दिक्कत होती है।
चल रही टेंडर प्रक्रिया
आइआरसीटीसी के रीजनल मैनेजर योगेंद्र सिंह गुर्जर का कहना है कि उदयपुर-खजुराहो ट्रेन, जयपुर-पुणे ट्रेन, बीकानेर- मुंबई दादर वेस्ट ट्रेन, जयपुर-बांद्रा टर्मिनस समेत कई ट्रेनों में पैंट्री कार के लिए टेण्डर प्रक्रिया चल रही है। जल्द सुविधा शुरू हो जाएगी। हालांकि यात्री वर्तमान में ई-कैटरिंग की सुविधा भी ले सकते हैं। परेशानी जैसी बात नहीं है।
Published on:
02 Sept 2022 10:56 pm
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