
professor arrested for taking bribe
राजस्थान विश्वविद्यालय में जिस शिक्षक को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने छात्र से 40 हजार लेते दबोचा, वह बचने के मामले में भी 'सेर बनाम सवा सेर' की कहावत चरितार्थ करने चला था। एएसपी नरोत्तम लाल वर्मा ने बताया कि आरोपित ने बड़ी फुर्ती दिखाई, नोटों की गडृडी गटर में फेंक खुद वाथरूम में छिप गया था...
बिल पास करने के 50 हजार मांगे, 10 हजार ले चुका था
एएसपी वर्मा के मुताबिक, राजस्थान के सबसे बड़े राजस्थान विश्वविद्यालय में एक साल बाद रिश्वत लेते हुए शिक्षक की गिरफ्तारी की बुधवार दोपहर भी बड़ी कार्रवाई हुई। आरोपी शिक्षक पकड़ा नहीं जा सके, इसलिए बचने की पूरी कोशिश की। वाथरुम में घुसकर दरवाजा भी बंद कर लिया था। लेकिन मंसूबों पर पानी फिर ही गया। बता दें कि, इस बार संस्कृत विभाग का अध्यापक डॉ. महीपाल सिंह यादव 40 हजार की रिश्वत लेते अरेस्ट हुआ है। आरोपित ने पीडि़त शोधार्थी से दो लाख रुपए के बिल पास करने के एवज में 50 हजार रुपए मांगे थे और 10 हजार रुपए पहले ही ले चुका था।
बिचौलिया चौकीदार भी गिरफ्तार कर लिया गया
एसीबी की कार्रवाई में आरोपित ने शोधार्थी से रुपए लिए लेकिन एसीबी देख बाथरूम के गटर में रुपए डालकर फ्लस भी चला दिया। एसीबी ने गटर से रकम बरामद करके उसे गिरफतार कर लिया। एसीबी ने शिक्षक के बिचौलिया चौकीदार मोहर सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। महीपाल ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित सरकारी क्वार्टर में पीडि़त छात्र इंद्र कुमार मीणा से रुपए लिए थे। उसके बाथरूम के गटर से 40 हजार रुपए बरामद हुए हैं।
उसने पीडि़त के दो लाख रुपए के बिल पास करने के एवज में 50 हजार रुपए मांगे थे। डॉ. महीपाल के मार्गदर्शन में पांच शोधार्थी हैं। इनमें एक छात्रा और चार छात्र हैं लेकिन डॉ. महीपाल को एक भी छात्र-छात्रा का का टॉपिक ही पता नहीं है।
एसीबी देख दरवाजा किया बंद, बाथरूम में छिप गया
पीडि़त से महावीर सिंह ने रुपए लिए लेकिन उसे क्वार्टर की खिड़की से एसीबी टीम दिख गई। उसने दरवाजा बंद कर दिया। पांच मिनट बाद उसने दरवाजा खोला लेकिन पहले ही एसीबी ने पुलस का पानी चलने की आवाज सुनी थी। इसलिए दरवाजा खुलते ही एसीबी सीधे बाथरूम में गई। वहां पर गटर में रुपए पड़े मिल गए। एसीबी ने गटर का पानी भी सैंपल बतौर लिया है।
दूसरे शिक्षक के नाम चौकीदार ने लिए 30 हजार
पीडि़त छात्र इंद्र कुमार का आरोप है कि विभाग में किसी भी छात्र की लिखी थीसिस जमा नहीं होती है। थीसिस निरस्त होने पर चौकीदार मोहर सिंह उन्ही छात्रों से संपर्क कर अन्य शिक्षक से थीसिस लिखने की सौदेबाजी करता है। वह छात्रों से शिक्षकों के लिए शराब की बोतलें और अन्य घरेलू काम करवाने के एवज में भी रुपए वसूलता था। उससे भी शराब की बोतल ली थी। मोहरसिंह ने उससे भी एक शिक्षक से थीसिस लिखवाने के नाम पर 30 हजार रुपए लिए थे। जिसकी भी शिकायत उसने एसीबी में की थी।
दो दिन पहले लिया 30 हजार का मोबाइल
इंद्र कुमार ने बताया कि दो दिन पहले ही शिक्षक डॉ. महीपाल ने एक गरीब छात्र से 30 हजार रुपए का मोबाइल गिफ्ट लिया है। एसीबी की पूछताछ में डॉ. महीपाल ने बताया कि उसने छात्र से मोबाइल मंगाया जरूर था लेकिन वह उसके रुपए उसे देता। उसने दोस्त को मोबाइल गि?ट कर दिया है, इसलिए जब्त नहीं हुआ।
मच गया अपहरण का हल्ला
एसीबी ने डॉ. महीपाल को गिरफ्तार करने के बाद चौकीदार मोहरसिंह को उठा लिया। इससे राजस्थान विश्वविद्यालय में चौकीदार के अपहरण का हल्ला मच गया। कई लोगों ने गांधीनगर पुलिस को भी सूचना दे दी लेकिन लोगों को जब पता चला कि एसीबी ने मोहरसिंह को उठाया है तो हैरान रह गए।
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Published on:
13 Apr 2017 01:53 pm
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