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कमिश्नरेट नहीं, नगर निगम और जेडीए में पोस्टिंग चाहते हैं निरीक्षक

पुलिस मुख्यालय से जारी तबादला सूची में 21 निरीक्षक शामिल किए गए हैं। अब 76 निरीक्षकों के तबादले होने बाकी हैं। कमिश्नरेट के पद भरने के लिए इच्छुक निरीक्षकों से आवेदन मांगे गए। इस पर करीब तीस आवेदन ही आए। जबकि खाली होने वाले पदों की संख्या करीब सौ है।

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कमिश्नरेट नहीं, नगर निगम और जेडीए में पोस्टिंग चाहते हैं निरीक्षक

कमिश्नरेट नहीं, नगर निगम और जेडीए में पोस्टिंग चाहते हैं निरीक्षक

ओमप्रकाश शर्मा

जयपुर. जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के 97 निरीक्षक चुनाव आचार संहिता के चलते तबादले की जद में हैं। इनमें से 21 के तबादले आदेश हो चुके हैं। अन्य के तबादलों को लेकर पुलिस अधिकारी मुश्किल में हैं। दरअसल कमिश्नरेट में खाली होने वाले पदों पर पोस्टिंग के लिए इच्छा पूछी तो गिने-चुने निरीक्षकों के ही आवेदन आए। इसके विपरीत जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग में पीसीपीएनडीटी सेल के लिए स्वीकृत पदों के मुकाबले कई आवेदन और डिजायर आ रही है। कुछ ऐसी ही स्थिति जोधपुर कमिश्नरेट की है।

चुनाव आचार संहिता के चलते उन निरीक्षकों के तबादले होने हैं जिनकी पोस्टिंग को तीन साल या इससे अधिक समय हो गया। यहां पदस्थापित 130 में से 97 निरीक्षक इस आदेश से प्रभावित होंगे। गत सप्ताह पुलिस मुख्यालय से जारी तबादला सूची में 21 निरीक्षक शामिल किए गए हैं। अब 76 निरीक्षकों के तबादले होने बाकी हैं। कमिश्नरेट के पद भरने के लिए इच्छुक निरीक्षकों से आवेदन मांगे गए। इस पर करीब तीस आवेदन ही आए। जबकि खाली होने वाले पदों की संख्या करीब सौ है। चुनाव के इस माहौल में पुलिस निरीक्षक कोतवाल बनने के बजाय जेडीए और नगर निगम की सतर्कता शाखा में जाने के इच्छुक हैं।

कुछ ऐसे ही हाल जोधपुर कमिश्नरेट के हैं। गत सप्ताह जारी तबादला सूची में वहां 23 निरीक्षकों को पोस्टिंग दी गई है। इनमें से कई अपना तबादला निरस्त कराने के लिए उच्चाधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं।

हमेशा ही पसंदीदा रहा जेडीए-निगम

ऐसा पहली बार नहीं है कि जयपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम पसंदीदा पोस्टिंग मानी जा रही है। दोनों ही स्थान पर पोस्टिंग के लिए जतन करने पड़ते हैं। फिर चाहे पद निरीक्षक, उप अधीक्षक या कोई और। यही कारण है कि यहां सामान्य पदस्थापन नहीं होता। यहां लगने के लिए पुलिस मुख्यालय और सरकार तक पहुंच जरूरी रहती है।