
जयपुर।
मौसम विभाग ने राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों में आंधी-तूफ़ान को लेकर अलर्ट जारी किया हुआ है। तेज़ हवाओं और इस संभावित खतरे के बीच एहतियातन सरकारी इंतज़ामों को पुख्ता किया जा रहा है। कुछ ज़िलों में कलेक्टर्स ने स्कूलों की छुट्टियां कर दी हैं। इन सब के बीच एक रोचक जानकारी से आपको रु-ब-रु करवाते हैं।
क्या आप जानते हैं कि तूफ़ान और अंधड़ जैसी अन्य प्राकृतिक बदलाव को लेकर सिर्फ मौसम विभाग ही पूर्वानुमान नहीं लगाता। बल्कि कुछ बेज़बान पशु-पक्षी भी मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने में सक्षम माने जाते हैं।
ये है रोचक बात
पक्षी और कुछ जानवर इंफ्रा ध्वनि सुन सकते हैं, जिनकी आवृति २० हर्ट्ज से कम हो, इसलिए संभव है कि बहुत फासलों पर मौजूद हवाओं की आवाज, सागर की लहरों के टकराने और ज्वालामुखी के फूटने से ऐसी इंफ्रा ध्वनि पैदा होती है जो पक्षी सुन सकते हैं। भले ही वे इन घटनाओं से हजारों किलीमीटर दूर ही क्यों न हों। बड़े तूफान या टॉरनेडो ऐसी शक्तिशाली इंफ्रा साउंड पैदा करते हैं।
चींटियां करतीं हैं बारिश की भविष्यवाणी!
चींटियों की गतिविधि को देखकर बारिश का सबसे पहले अंदाजा लगाया जा सकता है। माना जाता है कि अगर चींटियां भारी मात्रा में अपने समूह के साथ अंडे लेकर घर बदलती दिखाई दें, तो बारिश का मौसम शुरू होने का अनुमान लगाया जाता है। चिड़िया के घोंसले की उंचाई से भी बारिश का अंदाजा लगाया जाता है। अगर चिडि़या ने घोंसला पर्याप्त उंचाई पर बनाया हो, तो इसे अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है। यदि घोंसला नीचा है, तो वर्षा की अनुमान भी सामान्य से कम होने का लगाया जाता है।
जानवरों के अलावा पेड़, पौधों से भी वर्षा का अनुमान लगाने में मदद मिलती है। माना जाता है कि गोल्डन शावर नाम के पेड़ में फूल आने के 45 दिन के अंदर बारिश शुरू हो जाती है। इसी तरह अगर नीम का पेड़ फूलों से भर जाए, तो इसे बहुत अच्छी बारिश का संकेत माना जाता है।
ये हुआ शोध और ये निकला नतीजा
दरअसल, अमेरिका में वैज्ञानिकों ने सुनहरे पंखों वाली चिड़िया वॉर्ब्लर पर शोध किया है। शोध के मुताबिक अप्रैल २०१४ के अंत में अमेरिका के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में आने वाले तूफान से पहले यह पक्षी देश के पूर्वी हिस्से टेनेसी में स्थित पहाड़ियों को छोड़कर चले गए। वे टेनेसी में प्रजनन के लिए इकट्ठा होते हैं। इस तूफान के कारण ८४ बवंडर पैदा हुए और ३५ लोग मारे गए।
वॉर्ब्लर चिड़िया को खासतौर से चहचहाने के लिए जाना जाता है। इस छोटी और नाजुक चिड़िया का वजन मात्र नौ ग्राम होता है, लेकिन किसी तरह उन्हें उनके इलाके की तरफ बढ़ रहे तूफान का एक या दो दिन पूर्व ही पता चल जाता है।
यह पहला मौका था जब प्रजनन के मौसम के दौरान पक्षियों के तूफान से बचकर निकल जाने के व्यवहार का दस्तावेजी सबूत इकट्ठा किया गया। शोध करने वाले वैज्ञानिक यह तो जानते थे कि पक्षी अपने नियमित प्रवसन के दौरान कई चीजों से बचने के लिए रास्ता बदल लेते हैं। लेकिन शोध से पहले यह स्टडी नहीं की गई थी कि पक्षी प्रवसन के एक बार खत्म होने और प्रजनन की प्रक्रिया शुरू करने के बाद भी मौसम से बचने के लिए जगह छोड़ देते हैं।
शोध में ये आया सामने
जब ये पक्षी अपने निवास स्थान को छोड़कर उड़ गए तो तूफान कई सौ किलोमीटर दूर था। इसलिए हो सकता है कि मौसम, हवा का दबाव, तापमान और हवा की गति में ऐसे बदलाव हो रहे थे जिनका इन पक्षियों को आभास हो गया था।
शोध दल में से एक वैज्ञानिक स्ट्रेबी ने बताया, "हमारे शोध में वॉर्ब्लर ने कठोर मौसम से बचने के लिए कम से कम पंद्रह सौ किलोमीटर की उड़ान भरी। तूफान के गुजर जाने के बाद वे अपने घरों को लौट आईं।"
Published on:
08 May 2018 03:25 pm
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