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तेल कंपनी का मैनेजर बना आईएसआईएस आतंकी, कोर्ट ने सुनाई सजा

एनआइए कोर्ट ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के एजेंट मोहम्मद सिराजुद्दीन उर्फ मोहम्मद सिराज उर्फ सिराज को 7 साल कारावास एवं 26 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम (तेल) कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर सिराजुद्दीन को 17 फरवरी को विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत दोषी मान लिया था। हालांकि सजा की यह अवधि ट्रायल समाप्त होने से पहले ही पूरी हो चुकी थी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक उसे जेल में रखा जाएगा।

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एनआइए कोर्ट ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के एजेंट मोहम्मद सिराजुद्दीन उर्फ मोहम्मद सिराज उर्फ सिराज को 7 साल कारावास एवं 26 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम (तेल) कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर सिराजुद्दीन को 17 फरवरी को विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत दोषी मान लिया था। हालांकि सजा की यह अवधि ट्रायल समाप्त होने से पहले ही पूरी हो चुकी थी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक उसे जेल में रखा जाएगा।

एनआईए कोर्ट ने इस मामले में करीब 350 पेज का फैसला सुनाया। इसमें एनआईए की ओर से पेश सभी साक्ष्यों व गवाहों की विस्तृत विवेचना की है। इस मामले में एटीएस ने पेट्रोलियम कंपनी में अधिकारी रहते सिराजुद्दीन को 10 दिसंबर 2015 को गिरफ्तार कर मामला एनआईए को सौंप दिया था। एनआईए ने जांच में पाया कि सिराजुद्दीन फेसबुक, वाट्सऐप और टेलीग्राम सहित अन्य हाईटेक माध्यमों से युवाओं को आईएसआईएस में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करता था।

वह भारत में आईएसआईएस का ठिकाना बनाना चाहता था। वहीं गजवा-ए-तुल चैनल में उसने कश्मीर के आतंकियों को शहीद भी बताया था। उसके कब्जे से ओसामा बिन लादेन, मौलाना अनवर अवलाकी मौलाना और आसिम उमर आदि के भाषण और पुस्तकें भी बरामद हुईं। सिराजुद्दीन कश्मीर को इस्लामिक स्टेट बताकर भारत को अवैध कब्जा करने वाला हिस्सा बताता था। एनआईए ने आरोप पत्र में कहा कि आईएसआईएस का नेटवर्क तैयार होने के बाद वह लीबिया जाने वाला था। लंबी ट्रायल के बाद कोर्ट ने 17 फरवरी को सिराजुद्दीन को दोषी मानते हुए सजा के लिए सोमवार की तारीख तय की थी। इस पर कोर्ट ने सोमवार को सजा सुना दी।

7 साल की सजा सुनाई

कोर्ट द्वारा सिराजुद्दीन को दी गई सात साल की सजा अवधि पूरी हो चुकी है। ऐसे में वह जुर्माना राशि जमा करा देता है और एनआईए सजा को कम बताते हुए हाईकोर्ट में अपील नहीं करती है तो रिहाई संभव है।

जवाहर नगर से किया था गिरफ्तार

सिराजुद्दीन को एटीएस ने जवाहर नगर में उसके फ्लैट से गिरफ्तार किया था। तलाशी में आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ था और लेपटॉप से भी कई जानकारियां मिली थीं।

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