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IPD Tower : सरकार की बढ़ी टेंशन, नहीं मिली एयरपोर्ट एनओसी

मौजूदा सरकार कार्यकाल में फीता काटने की चिंता

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This big news about Jaipur hospitals

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भवनेश गुप्ता
जयपुर। शहर के सवाई मानसिंह अस्पताल में बनने वाले 115 मीटर ऊंचे आईपीडी टॉवर के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी से अब तक सम्पूर्ण ऊंचाई की एनओसी नहीं मिलने से सरकार से लेकर जेडीए तक में टेंशन बनी हुई है। इसके लिए अभी तक 51.48 मीटर ऊंचाई की ही एनओसी मिली है और बाकी अनुमति के लिए दिल्ली स्थित केन्द्रीय एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास आवेदन भेजा गया है। इसमें भी काफी समय निकल गया, ऐसे में सरकार को मौजूदा कार्यकाल में फीता नहीं काट पाने की आशंका सता रही है। इसी कारण अब दोबारा एयरपोर्ट अथॉरिटी से संपर्क साधा गया है। नगरीय विकास मंत्री भी इस मामले में जेडीए अधिकारियों से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। अफसर अब दिल्ली जाने की भी तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि आईपीडी टॉवर प्रदेश की सबसे ऊंची इमारत होगी।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यह दिया तर्क
-ऊंचाई की लिए जो एनओसी प्रक्रिया अपनाई गई, उसमें 51.48 मीटर के लिए ही एनओसी दी जा सकती है। इससे अधिक ऊंचाई के लिए आवेदन की अगली प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है।
-आवेदन की दूसरी प्रक्रिया के लिए केन्द्रीय एयरपोर्ट अथॉरिटी को नए सिरे से आवेदन किया गया है।

अभी यह भी पार करना है

1. पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया भी शुरू : इस प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण स्वीकृति के लिए भी आवेदन कर दिया गया है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के अफसरों के साथ बैठक भी हो चुकी है। यूडीएच और जेडीए दोनों मिलकर इस पर काम कर रहे हैं।

2. कोर्ट से लेनी होगी अनुमति : हाईकोर्ट ने कुणाल रावत बनाम सरकार के केस में फिलहाल 32 मीटर तक ही निर्माण की अनुमति दे रखी है। अभी शहर में 42 मीटर ऊंचाई तक स्नार्गल लैडर और अब 70 मीटर ऊंचाई तक मशीन आ रही है। हालांकि,अफसरों ने तर्क दिया कि इससे ज्यादा ऊंचाई की इमारतों में आग बुझाने के लिए अंदरुनी ही संसाधन लगते हैं।

आईपीडी टॉवर की घटाई ऊंचाई
टॉवर की ऊंचाई 125 मीटर से घटाकर 115 मीटर किया जा रहा है और इसी आधार पर तीसरी बार टेंडर जारी किया गया है। इसमें भूतल व ऊपरी सभी मंजिलों की संख्या 22 ही रहेगी, इसके लिए हर मंजिल की ऊंचाई कुछ कम की जाएगी। इसके अलावा तीन की जगह अब दो ही बेसमेंट बनाए जाएंगे। मौजूदा प्लानिंग में से दो सर्विस फ्लोर हटाए जाएंगे। अब इनकी जरूरत नहीं मानी जा रही है। टॉवर की निर्माण लागत घटाने के लिए लगातार बदलाव किए जा रहे हैं।


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