1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आइपीएस सूची में कई अधिकारियों की पोस्टिंग चौंकाने वाली, आचार संहिता के दौरान कांग्रेस ने की थी शिकायत

एनआरके रेड्डी के तबादले में दिख रही भावी डीजीपी के लिए खींचतान...

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Dinesh Saini

Dec 24, 2018

IPS

- ओमप्रकाश शर्मा


जयपुर। हाल ही डीजी काडर में शामिल किए nrk Reddy की सरदार पटेल यूनिवर्सिटी में पोस्टिंग और कुछ अधिकारियों को तबादला सूची में शामिल न करने का निर्णय चौंकाने वाला रहा। रेड्डी अगले साल डीजीपी बनने वाले अफसरों में सबसे ऊपर हैं। ऐसे में साफ है कि भावी डीजीपी के लिए समीकरण अब शुरू हो चुके हैं।

रेड्डी 2015 में प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद लगातार कानून व्यवस्था का जिम्मा सम्भाले हुए थे। यह कहा जाता है कि गत सरकार से उनकी ट्यूनिंग ठीक थी। हालांकि व्यक्तिगत रूप से उन्हें फायदा नहीं मिला। सरकार ने 1986 बैच के दलपत सिंह दिनकर को जुलाई में डीजी काडर में शामिल किया। इसके अगले दिन जारी तबादला सूची में उन्हीं के बैच के अन्य तीन अधिकारी रेड्डी, अलोक त्रिपाठी और भूपेन्द्र यादव को डीजी पद दिया। दिनकर की तरह अन्य तीन अधिकारियों का पे-स्केल आदेश जारी नहीं किया। 30 सितम्बर को दलपत सिंह के सेवानिवृत्त होने पर भी आदेश नहीं निकले। आचार संहिता के दौरान निर्वाचन विभाग की इजाजत पर केवल रेड्डी की पदोन्नति के आदेश जारी हो पाए। मामले में नया मोड़ तब आया जब कांग्रेस की ओर से इस मामले की निर्वाचन आयोग को शिकायत की गई। शिकायत का असर उस समय तो नही दिखा, लेकिन अब तबादला सूची में यह असर देखा गया। उन्हें एडीजी स्तर की पोस्टिंग दी गई। 6 माह बाद रेड्डी के अलावा आलोक त्रिपाठी और भूपेन्द्र यादव डीजीपी के दावेदारों में शामिल होंगे।

सुनील महरोत्रा दो माह बाद ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वर्तमान डीजीपी कपिल गर्ग के सेवानिवृत्त होने पर वरिष्ठता सूची में ओ.पी.गल्होत्रा के बाद रेड्ड़ी और उसके बाद त्रिपाठी व यादव होंगे। आलोक त्रिपाठी और भूपन्द्र यादव को अब किसी नए स्थान पर पोस्टिंग से ज्यादा इंतजार अपनी पे-स्केल के आदेश का है। वे अपने-अपने स्तर पर प्रयास भी कर रहे हैं। गल्होत्रा को सरकार ने तीन दिन पहले ही हटाया है। ऐसे में कपिल गर्ग के सेवानिवृत्त होने के बाद डीजीपी के लिए सबसे वरिष्ठ अधिकारी रेड्डी ही रहेंगे। उनकी सेवानिवृत्ति वर्ष 2020 में है। मुख्यालय के अधिकारी कांग्रेस की रेड्डी को लेकर की गई शिकायत को भी इसी समीकरण से जोड़ कर देख रहे हैं। रेड्डी अब प्रतिनियुक्ति पर भी जा सकते हैं।

पहुंच वाले अधिकारी सूची में नहीं
चर्चा कुछ अधिकारियों के नाम सूची में शामिल नहीं करने पर भी है। इसमें एडीजी भूपेन्द्र दक, सौरभ श्रीवास्तव व राजीव दासोत हैं। भूपेन्द्र दक गहलोत सरकार के समय पहले जोधपुर रेंज आइजी, जोधपुर कमिश्नर और फिर जयपुर कमिश्नर रहे। अभी वे प्लानिंग और वेलफेयर का जिम्मा सम्भाले हुए हैं। इससे पहले एसीबी में रहे। एसीबी की पोस्टिंग को सूची में शामिल नहीं होने को जोडकऱ देखा जा रहा है। हालांकि वे खुद भी बदलाव के लिए प्रयासरत नहीं दिखे। इसी तरह मुख्यमंत्री सुरक्षा का जिम्मा सम्भाल चुके सौरभ श्रीवास्तव का नाम भी तबादला सूची में शामिल नहीं रहा। प्रभावी अधिकारियों की सूची में शामिल होने के बाद भी गत सरकार में उनकी पोस्टिंग अपेक्षाकृत कमतर रही। राजीव दासोत का नाम भी सूची में शामिल नहीं किया गया। इस सूची में एडीजी एटीएस और सिविल राइट का पद खाली रखा गया है। यहां इन तीन अधिकारियों में से किसी का नाम सामने आ सकता है, लेकिन इनमें से एक पद आयोग में बैैठे एक अन्य अधिकारी को भी मिल सकता है।