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ISKCON Temple 250000 किलोमीटर यात्रा कर पहुंची पदयात्रा

मानसरोवर के गिरिधारी दाऊजी मंदिर, इस्कॉन (Giridhari Dauji Temple, ISKCON) में बुधवार को देशभर में भ्रमण करती हुई पदयात्रा पहुंची। पदयात्रा के साथ रथयात्रा भी निकाली गई, जिसमें भगवान श्री नीताई गौर सुंदर के विग्रहों की सेवा करते हुए भक्त चलते रहे। मानसरोवर जयपुर मंदिर अध्यक्ष पंचरत्न दास ने बताया की इस्कॉन (ISKCON Temple) की भारत वर्ष में भ्रमण करने वाली पदयात्रा मंदिर पहुंची।

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ISKCON Temple 250000 किलोमीटर यात्रा कर पहुंची पदयात्रा

ISKCON Temple 250000 किलोमीटर यात्रा कर पहुंची पदयात्रा

ISKCON Temple 250000 किलोमीटर यात्रा कर पहुंची पदयात्रा
— भारत भ्रमण पर निकली पदयात्रा, रथ में विराजे भगवान श्री नीताई गौर सुंदर के श्रीविग्रह

जयपुर। मानसरोवर के गिरिधारी दाऊजी मंदिर, इस्कॉन (Giridhari Dauji Temple, ISKCON) में बुधवार को देशभर में भ्रमण करती हुई पदयात्रा पहुंची। पदयात्रा के साथ रथयात्रा भी निकाली गई, जिसमें भगवान श्री नीताई गौर सुंदर के विग्रहों की सेवा करते हुए भक्त चलते रहे।

मानसरोवर जयपुर मंदिर अध्यक्ष पंचरत्न दास ने बताया की इस्कॉन (ISKCON Temple) की भारत वर्ष में भ्रमण करने वाली पदयात्रा मंदिर पहुंची। 37 वर्ष से यह पदयात्रा निरंतर प्रतिदिन 15 किलोमीटर चलती है। अब तक यह 250000 किलोमीटर से ज्यादा यात्रा कर चुकी है।

पदयात्रा में भगवान श्री नीताई गौर सुंदर के श्रीविग्रह की सेवा की जाती है। पदयात्रा में शामिल रथ में 6 बैलों की जोड़ी रहती है। पदयात्रा के साथ 25 ब्रह्मचारी पैदल चलते हुए श्रीनीताई गौर सुंदर की सेवा करते है। पदयात्रा अब तक 30 राज्यों के बड़े शहरों और गावों में सनातन धर्म प्रचार प्रसार कर श्री चैतन्य महाप्रभु के पदचिन्हों का अनुसरण कर रही है।

मानव कल्याण का उद्देश्य...
पदयात्रा के प्रबन्धक आचार्य दास ने बताया की यह पदयात्रा द्वारका, बद्रीनाथ, जगन्नाथ पूरी, रामेश्वरम भी जा चुकी है। पदयात्रा का मुख्य उदेश्य संकीर्तन, ग्रंथ वितरण, भगवान का प्रसाद वितरण, गांव—गांव, शहर—शहर में मानव कल्याण के लिए लोगों को अधिक से अधिक कृष्ण भावनामृत के लिए जाग्रत करना है। पदयात्रा में निरंतर हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन चलता रहता है।

रसोई भी चलती है साथ...
पदयात्रा में अलग अलग रथों में भगवान को भोजन बनाकर भोग लगाने के लिए पूरी रसोई साथ रहती है। भगवान श्री नीताई गौर सुंदर को रथयात्रा में रहते हुए प्रतिदिन 8 बार भोग लगाया जाता है।