
मालिकाना हक जेडीए का पर जिम्मेदारी मुंह मोड़ रहा
जयपुर। जयपुर विकास प्राधीकरण ने गोनेर के जगन्नाथ सागर के बेशकीमती 9 हेक्टर जमीन का मालिकाना हक तो ले लिया है, लेकिन, इसके रख रखाव की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। जेडीए के अधिकारियों का कहना है कि यह काम उनका नहीं है। गोनेर को हेरिटेज विलेज बनाने के लिए राज्य सरकार ने 125 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की थी। जिसमें विरासत को संजोते हुए कस्बे में विकास कार्य करवाएं जाने थे। इसमें गोनेर में पहचान रखने वाले जगन्नाथ सागर तालाब का सौन्दर्यन भी था। लेकिन, मजे की बात यह है कि दो साल में जेडीए ने जगन्नाथ सागर के सौन्दर्यन पर फुटी कोडी भी खर्च नहीं की। उल्टा गोनेर में हुई तोड़—फोड़ के मलबे की सैकड़ों ट्राली मलबे की सिरोली की तरफ से आने वाली नहर व तालाब में डाल कर गला घोंट दिया। जब जेडीए के अधिकारियों से इस बारे में बात की गई तो जेडीए के अधिकारियों ने इसकी जिम्मेदारी जलदाय विभाग व सिंचाई विभाग की होना कह कर पल्ला छाड़ लिया। जबकि वर्तमान में मालिकाना हक जेडीए का है। जेडीए के अधिकारियों का कहना है हमारा काम केवल गोनेर में सीवर लाइन डालने एवं सड़के बनाने तक ही है ना तालाब को पानी से भरने का।
जगदीश मंदिर से गोनेर की पहचान
गोनेर में जगदीश महाराज के दर्शनों के लिए एवं सवामणी के लिए हर माह हजारों श्रद्धालु आते हैं। यहां आने वाला हर श्रद्धालु दर्शनों के बाद तालाब को देखने के लिए जरुर आता हैै। ऐसे में तालाब के बिना गोनेर को हेरिटेज विलेज बनाने का सपना अधुरा ही रहेगा। जेडीए के अधिकारियों की माने तो तालाब के सौन्दर्यन के लिए जेडीए के पास ना तो योजना है और ना ही बजट है। ऐसे में जगन्नाथ सागर के सौन्दर्यन के बिना गोनेर को हेरिटेज विलेज बनाना बेमानी होगा।
पहले ताेड़ी तालाब की पाल
जेडीए गोनेर को हेरिटेज विलेज बनाने के नाम पर परंपरागत जल स्त्रोतों को नष्ट करने की बात नई नहीं है। इससे पहले सड़क चौड़ी करने के नाम पर जेडीए ने तालाब की पाल को तोड़ कर इसके पुराने स्वरूप को बिगाड़ दिया था। यही नहीं तालाब के पास बागड़ा धर्मशाला के पास स्थित कुएं को पाट सड़क चौड़ी कर दी। उसके बाद महादेवजी की बावड़ी को पाट कर सड़क निकालने की भी योजना बनाई थी, लेकिन न्यूज टुडे ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तो जेडीए पीछे हट गया।
—मानसून आने से पहले ग्राम पंचायत तीनों नहरों की मरम्मत कराने के साथ ही तालाब से कंटीली झाड़ियों को हटवाने का काम करती थी। लेकिन जेडीए की खातेदारी में चढ़ने के बाद पंचायत ने भी तालाब पर ध्यान देना छोड़ दिया है।
मीना पटवा, पूर्व सरपंच गोनेर
जगन्नाथ सागर का हमारे पास कोई रिकार्ड नहीं है। मालिकाना हक जब जेडीए का है तो उसके रख रखाव की जिम्मेदारी भी उनकी ही है।
रवि सोलंकी, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
Published on:
25 Jun 2018 01:16 pm
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