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स्मार्ट बनाना था जगन्नाथ सागर तालब काे, अफसरशाही ने घाेट दिया गला

करोड़ों रूपए की विकास योजनाओं से हालात बदलने का दावा करने वाला सरकारी तंत्र कैसे पुरानी व्यवस्थाओं को ही तहस-नहस कर देता है, इसकी सटीक मिसाल पेश की है जयपुर विकास प्राधिकरण ने। मामला गोनेर के 9 हैक्टेयर में फैले प्राचीन जगन्नाथ सागर से जुड़ा है।

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स्मार्ट बनाना था जगन्नाथ सागर तालब काे, अफसरशाही ने घाेट दिया गला

देवेन्द्रसिंह

जयपुर। करोड़ों रूपए की विकास योजनाओं से हालात बदलने का दावा करने वाला सरकारी तंत्र कैसे पुरानी व्यवस्थाओं को ही नष्ट भ्रष्ट कर देता है, इसकी सटीक मिसाल पेश की है जयपुर विकास प्राधिकरण ने। मामला गोनेर के 9 हैक्टेयर में फैले प्राचीन जगन्नाथ सागर से जुड़ा है। आजादी के बाद से ग्राम पंचायत की देखरेख में हर साल मॉनूसन लबालब होने वाला प्राचीन जगन्नाथ सागर 4 साल पहले स्मार्ट बनाने के लिए जेडीए को क्या सौंपा गया, हालात ही बदल गए। आज तालाब में पानी की एक बूंद तक नहीं है।

जेडीए के पास मालिकाना हक, उसी ने बना दी नहराें पर सड़क
गोनेर के प्राचीन जगन्नाथ सागर में तीन नहरों के जरिए बारिश का पानी आता था। इनमें एक नहर सिरोली-दांतली की पहाडिय़ों से निकलती है, तो दूसरी जगतपुरा-किशनपुरा की तरफ से आती है। तीसरी नहर खोड़क्या की ढाणी के आगे से आती है। मॉनसूनी सीजन में इन नहरों से जगन्नाथ सागर में पानी की खूब आवक हो जाती थी। कई बार तो तालाब एक जोरदार बारिश में ही लबलबा हो जाता था। आजादी के बाद से ही बरसात से पहले इन नहरों के रखरखाव का काम ग्राम पंचायत करती आ रही है। लेकिन 2014-15 में तालाब का मालिकाना हक जेडीए के पास आ गया। जिस जेडीए को तालाब की देखरेख करनी थी, उसी जेडीए ने नहर में सड़क बनाकर रास्ता बंद कर दिया, तब से जगन्नाथ सागर साल दर साल सूखता गया। अब हालात ये हो गए हैं कि तालाब में एक बूंद पानी भी नहीं बचा है। बचे हैं तो बस उसमें उगे झाड़ झंखाड़।

हेरिटेज विलेज के साथ बना था स्मार्ट तालाब का प्लान

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने गोनेर को हेरिटेज विलेज बनाने के लिए करीबन 125 करोड़ रूपए की योजना तैयार की। गोनेर को हेरिटेज विलेज बनाने का जिम्मा जेडीए को दिया गया। जिसमें प्रसिद्ध लक्ष्मी जगदीश मंदिर को धार्मिक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के साथ ही जगन्नाथ सागर को स्मार्ट तालाब बनाने की योजना को इसमें शामिल किया गया। गोनेर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जगन्नाथ सागर में बोटिंग शुरू करने सहित इसके आसपास हरियाली विकसित करने की योजना थी। जगन्नाथ सागर में होने वाले विकास कार्यों के लिए इसका मालिकाना हक जेडीए को दिया गया। लेकिन जेडीए ने अब तक जगन्नाथ सागर की सुध नहीं ली है।

नहरों के रास्ते बंद, कैसे आएगा बारिश का पानी

जयपुर में मॉनसून पहुंचने में बमुश्किल 15 दिन बाकी बचे हैं। लेकिन जगन्नाथ सागर की नहरों के रास्ते बंद पड़े हैं। ऐसे में इन नहरों का पानी तालाब तक कैसे पहुंचेगा ये बड़ा सवाल है। ना तो जेडीए ने तालाब की नहरों से अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई की है और ना ही ग्राम पंचायत ने इस दिशा में कोई कदम उठाया है। मौजूदा हालात से तो लगता है कि इस बार भी प्राचीन जगन्नाथ सागर भरी बरसात में भी सूखा ही रह जाएगा।

मुझे मालुम नहीं है गोनेर में जगन्नाथ सागर तालाब कहां पर है। अगर ऐसा है ताे मैं मामले को दिखवाकर बताता हूं।
रामनारायण बडगुजर, उपायुक्त, जेडीए जोन 9


जगन्नाथ सागर में पानी नहरों के जरिए ही आता है, यदि जेडीए नहरों से अतिक्रमण हटा दे तो इस बार बारिश में तालाब भर सकता है। अतिक्रमण नहीं हटे तो इस बार भी तालाब सूखा रह जाएगा।
अरूण जैन, उप सरपंच, गोनेर

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