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लोकरंग- 150 कलाकारों ने बांधा समां

जयपुर। देश के विभिन्न क्षेत्रों की लोक संस्कृति की झलक, उत्साह और जोश जवाहर कला केंद्र की ओर से आयोजित लोकरंग महोत्सव के तीसरे दिन नजर आया। बुधवार को मध्यवर्ती और शिल्पग्राम दोनों में लगभग 150 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Oct 12, 2022


जयपुर। देश के विभिन्न क्षेत्रों की लोक संस्कृति की झलक, उत्साह और जोश जवाहर कला केंद्र की ओर से आयोजित लोकरंग महोत्सव के तीसरे दिन नजर आया। बुधवार को मध्यवर्ती और शिल्पग्राम दोनों में लगभग 150 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। जहां एक ओर ढलती शाम के साथ ही लोगों ने यहां अलगोजा वादन, तेराताली और हेला ख्याल प्रस्तुति का आनंद लिया। वहीं दूसरी तरफ हस्तशिल्प उत्पादों की स्टॉल्स, विभिन्न राज्यों के व्यंजन चखने का मौका और मनोरंजक गतिविधियां दर्शकों को एक ही जगह मिल रहे हैं।
राजस्थानियों की जीवंतता जाहिर
तमिलनाडु के थपट्टम लोक नृत्य के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके जरिए पूरा माहौल लोक संस्कृति के रंग में रंग गया। इसके बाद बीनए भपंग जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन गूंज उठी। मधुर धुन और ढोलक की थाप के साथ पुरुष कलाकारों ने घुंघुरू बांधकर जिस बेफिक्री से नृत्य कियाए उसने राजस्थानियों की जीवंतता को बखूबी जाहिर किया। समूह के अगुआ 72 वर्षीय राम कुमार नाथ ने कहा कि लोकरंग उत्सव लुप्त होती लोक कलाओं को जानने के मौके की तरह है। उन्होंने यह भी कहा मंच और बीन वादन ही उनका जीवन है।
चकरी और रसकेलि ने खींचा ध्यान
गुजरात के गरबे के बाद चकरी नृत्य की प्रस्तुति ने लोगों का ध्यान खींचा। 80 कली का घाघरा, कुर्ती.कांचली और आभूषण पहनी महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य के जरिए हाड़ौती अंचल की संस्कृति से रूबरू करवाया। पहली फसल कटने के अवसर पर किए जाने वाले ओडिशा के रसकेलि नृत्य की प्रस्तुति ने फिर ऊर्जा संचार किया। कलाकारों ने तारतम्यता को बरकरार रखा। जोश के साथ शुरू हुई प्रस्तुति करतब और उल्लास के साथ खत्म हुई।
रंगरेज में दिखा अनोखा संगम
इसके बाद बीहू और होली नृत्य ने महफिल सजाए रखी। अंत में हुई रंगरेज प्रस्तुति खास रही। इसमें कथक और कालबेलिया नृत्य का समागम देखने को मिला। कथक और कालबेलिया का ऐसा संयोजन देख लोग रोमांचित हो उठे। कालबेलिया का जोश और कथक में दिखने वाला फुटवर्क नजाकत के साथ दर्शाया गया।