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जेल विभाग को फिर से याद आया पीसीओ प्रोजेक्ट

प्रदेश की जेलों में मोबाइल मिलने की घटनाओं के बीच जेल विभाग के अफसरों को एक बार फिर से पीसीओ प्रोजेक्ट की याद आई है।

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PCO project again

central jail

सात डीजी बदले, लागू नहीं हो सका ग्यारह साल पुराना प्रोजेक्ट,

जयपुर

प्रदेश की जेलों में मोबाइल फोन का प्रयोग बंद करने के लिए सरकार और जेल विभाग के अफसरों ने तमाम कोशिशें की, लेकिन उसके बाद भी जेलों में मोबाइल फोन का प्रयोग बढ़ता ही जा रहा है। जयपुर जेल मेंं बंद बंदियों के हाथों मे मोबाइल फोन के चलते जेल अधीक्षक को उनको पद से हटा दिया गया है। अब बीकानेर जेल अधीक्षक को ही जयपुर जेल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। उधर जेल विभाग के अफसरों को अब वह प्रोजेक्ट फिर से याद आ गया है जिसे ग्यारह साल में सात डीजी भी लागू नहीं करा सके। अब वर्तमान डीजी जेल इसे लागू करने की कोशिश में हैं।

यह थी पीसीओ प्रोजेक्ट योजना


दरअसल प्रदेश की जेलों मेें मोबाइल फोन मिलने के मामले 2004 से ही सामने आने लगे थे। प्रदेश की जेलों में सबसे पहला मोबाइल फोन जोधपुर और जयपुर की जेलों मंे मिला था। जेलों में मोबाइल के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए सरकार ने जेलों में पीसीओ लगाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। सभी सेंट्रल जेलों में दो से लेकर छह पीसीओ लगने थे। इन पीसीओ पर बात करने के लिए बंदियों से ही मामूली शुल्क लिया जाना था और उनको हर सप्ताह अपने किसी दो रिश्तेदार ( जिनकी जानकारी जेल अफसरों को हो) से बात करने की छूट थी। उनसे एक घंटे से डेढ़ घंटे बात की जा सकती थी। पीसीओ मशीन लगाने के पीछे दो उद्देश्य थे, पहला बंदियों के बारे मेें जानकारी जुटाई जा सकती थी और दूसरा मोबाइल प्रयोग को रोका जा सकता था। लेकिन प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सका।

आंध्र प्रदेश की जेलों का किया गया था दौरा

जेल विभाग के तत्कालीन अफसरों ने उस समय तीन जेलरों को आंध्र प्रदेश की जेलों का दौरा करने भी भेजा था। क्योंकि आंध्र प्रदेश का जेल विभाग पहला महकमा था, जिसने मोबाइल प्रयोग को बंद करने के लिए जेलों में पीसीओ मशीन लगाई थी। पहले इसे प्रयोग के तौर पर दस दिन लगाया गया था। बंदियों से पॉजिटिव व्यू मिले तो इसे प्रदेश की जेलों में लगाया गया था। हर जेल में दो से पांच पीसीओ मशीने लगाई गई थी।

कागजों से बाहर नहीं आया प्रोजेक्ट


जेलों में मोबाइल फोन के प्रयोग को पूरी तरह से बंद करने के लिए ग्यारह साल में सात अफसरों ने काम किया। ये अफसर या तो डीजी जेल रहे या फिर उनके पास डीजी जेल का कार्यभार रहा। इन अफसरों मंे रिटायर आईपीएस पीके तिवारी, ओमेन्द्र भारद्वाज, अजीत सिंह , मनोज भट्ट समेत आईपीएस भूपेन्द्र दक, सुनील मेहरोत्रा और वर्तमान कार्यवाहक डीजी भूपेन्द्र सिंह शामिल हैं।