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ऐसा क्या हुआ कि गुलाबी नगरी के पर्यटन स्थलों पर सैलानी नहीं पहुंच रहे

आमेर फोर्ट से लेकर अल्बर्ट हाल तक का बुरा हाल। सामान्य दिनों की तुलना में आधे रहे गए पर्यटक

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अश्विनी भदौरिया/ जयपुर।

बढ़ते पारे से हर कोई परेशान है। स्थिति यह है कि दिन भर बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है। शाम होने के बाद एक बार फिर से बाजार में चहल-पहल रहती है। शहर के व्यस्त जगहों में से एक परकोटा में इन दिनों दिन भर सडक़ें खाली रहती हैं और दुकानों पर ग्राहकों की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिन भर लोग सुस्ताते देखे जा सकते हैं। यही हाल शहर के अन्य इलाकों का भी है। दिन भर दुकानदारों को आराम करते हुए देखा जा सकता है। व्यापारियों का कहना है बीते एक सप्ताह में दिन की बिक्री में २५ से ३० फीसदी की बिक्री में गिरावट आई है। यही स्थिति पर्यटन स्थलों की भी है। सुबह ११ बजे तक ही पर्यटकों की संख्या अच्छी खासी रहती है। सूरज चढऩे के साथ पर्यटक स्थलों से सैलानी गायब होने लगते हैं।

अब वाहनों की स्पीड भी बढ़ गई
टोंक रोड, जेएनएन मार्ग से लेकर गोविंद मार्ग पर अब वाहनों को रफ्तार के साथ चलते हुए देखा जा सकता है। परकोटा में जौहरी बाजार और हवामहल रोड पर दिन भर जाम दिखता था। अब स्थिति सामान्य है। यहां पहले बमुश्किल २० किमी प्रति घंटा की स्पीड से वाहन रेंगते थे अब स्पीड ५०-६० के बीच होती है।

तीन-तीन घंटे हो रही बिक्री
बाजार की स्थिति देखें तो सुबह आठ से ११ बजे और शाम को पांच से आठ बजे तक बाजार में अच्छी खासी चहल पहल रहती है। दिन में छह घंटे तक इक्का दुक्का ग्राहक ही बाजार में आते हैं। वेडिंग सीजन होने की वजह से उन बाजारों में थोड़ी बहुत चहल-पहल जरूर रहती है, जहां पर शादियों से संबंधित सामान मिलता है।

पर्यटकों की संख्या में आई गिरावट
पर्यटन सीजन में आमेर फोर्ट का दीदार करने के लिए प्रतिदिन 10 हजार से अधिक पर्यटक पहुंचते हैं। इन दिनों यह संख्या घटकर 3000 के आस-पास आ गई है। बीते एक सप्ताह में देखें तो 27 अप्रेल को यहां 2296 सैलानी ही पहुंचे। यही स्थिति अल्बर्ट हॉल की भी है। इसी तारीख को यहां पर महज 1032 पांवणे आए। वहीं नाहरगढ़ फोर्ट को देखने के लिए 27 अप्रेल को 500 के आस-पास पर्यटक ही पहुंचे। विभिन्न पर्यटक स्थलों के अधीक्षकों की मानें तो सभी का कहना है कि गर्मी की इस बार अप्रेल के अंत में गर्मी बढऩे से देसी सैलानियों की संख्या कम रही है। आमतौर पर यह संख्या 15 मई के बाद कम होना शुरू होती थी।