दरअसल, राज्य सरकार ने साल 2010 में हाथीगांव विकसित किया था। यहां हाथियों के लिए थान, महावतों के लिए मकान बनाए थे। हाथियों के तालाब, निगरानी के लिए चौकी और सफारी के लिए ट्रैक भी बनाए थे। उस वक्त वहां 110 हाथी थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर 76 ही रह गई है।