-गोल्फ क्लब का दावा भूमि क्लब हिस्से में शामिल, मंत्री की दो टूक- पूरे परिसर की भूमि जेडीए स्वामित्व की
-जमीन समतलीकरण करने और पेड़ काटने की थी शिकायत, पहले होगी तारबंदी और फिर जांच
– यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने देखा मौका
जयपुर। सेंट्रल पार्क (Jaipur Central Park) से सटी जेडीए की सात बीघा भूमि (हॉर्स ब्रीडिंग फार्म) से तारबंदी हटाने और जमीन समतीकरण करने के मामले में नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल (UDH Minister Shanti Dhariwal) सक्रिय हो गए। धारीवाल शुक्रवार को मौके पर पहुंचे और उन्होंने बिना अनुमति जेडीए की जमीन को गोल्फ क्लब में मिलने पर नाराजगी जताई। इसके बाद जेडीए अफसरों को तत्काल तारबंदी के लिए पाबंद किया। धारीवाल ने मौके पर ही क्लब संचालकों को बुलाया और इस स्थिति को लेकर जवाब तलब किया।
क्लब पदाधिकारियों ने दावा किया कि एग्रीमेंट के तहत यह भूमि क्लब में ही शामिल है। इस पर मंत्री ने कह दिया कि यहां तो पूरे परिसर की भूमि ही जेडीए (Jaipur Development Authority) स्वामित्व की है। क्लब के लिए जो जमीन दी गई है, वे उससे आगे नहीं आएं। मामले की जांच के लिए कमेटी बनाने के भी निर्देश दिए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके। सेंट्रल पार्क बचाओ संघर्ष समिति के योगेश यादव ने इस बारे में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को शिकायत की थी।
अफसरों की कार्यशैली भी कठघरे में…
-इस मामले में जेडीए (JDA) अधिकारियों की कार्यशैली भी कठघरे में है, क्योंकि जेसीबी से जमीन समतलीकरण किया जाता रहा। ऐसा कैसे संभव है कि अफसरों को इसकी जानकारी नहीं थी।
-पार्क में घूमने आने वाले लोगों और सेंट्रल पार्क बचाओ संघर्ष समिति सदस्यों ने इसकी जानकारी जेडीए को दी। फिर भी अफसर एक्शन में क्यों नहीं आए? समय रहते हकीकत पता क्यों नहीं की।
एग्रीमेंट में जमीन का उपयोग क्लब के पास, मंत्री को गुमराह कर रहे…
गोल्फ क्लब के कैप्टन शिरीष संचेती का कहना है कि कुछ लोग यूडीएच मंत्री (Shanti Dhariwal) को गुमराह कर रहे हैं। जब गोल्फ क्लब के लिए एग्रीमेंट हुआ था, उसमें भी यह जमीन क्लब उपयोग के लिए ही अंकित है। पहले किसी और कब्जा था, जिसे कोर्ट के आदेश पर जेडीए ने हटाया था। इसके बाद क्लब इसका उपयोग सामान रखने, कचरा एकत्र करने के लिए कर रहा था। अब व्यवस्थित हरियाली के लिए काम कर रहे थे।
-यूडीएच मंत्री ने जमीन पर फिर से तारबंदी के निर्देश दिए हैं, इसकी पालना सुनिश्चित की जाएगी। – रवि जैन, जेडीसी