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चोरी की 100 वारदात, गैंग में एक गुर्गा ऐसा भी, वारदात के समय असली व नकली गहनों की पहचान करता

पकड़े तो 20 वारदातें और कबूली, अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश : सरगना पिता ने पुत्र व दामाद और दो अन्य को कर रखा था गैंग में शामिल  

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जयपुर. करणी विहार थाना पुलिस ने शुक्रवार को अंतरराज्यीय नकबजन गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह में सरगना पिता ने पुत्र व दामाद और दो अन्य लोगों को शामिल कर रखा था। गैंग के खिलाफ 100 से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पकड़े जाने पर गिरोह ने पुलिस के समक्ष 20 और वारदातें अंजाम देना कबूल किया है।

डीसीपी ऋचा तोमर ने बताया कि भीलवाड़ा के फूलिया कलां स्थित कनेछन निवासी हिस्ट्रीशीटर और गिरोह के सरगना किशनलाल बैरवा, उसके बेटे कमलेश बैरवा, अजमेर के नसीराबाद निवासी दामाद रईस उर्फ इमामुद्दीन, फूलिया कलां स्थित बजरंगपुरा खेड़ा निवासी शैतान बागरिया तथा उसके भाई भागचंद बागरिया को गिरफ्तार किया गया। भागचंद पॉक्सो व बलात्कार के मामले में वांटेड है। जबकि पिता-पुत्र के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट हैं। डीसीपी तोमर ने बताया कि करणी विहार थाने में गत जनवरी में नरेश आसोपा ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। आसोपा परिवार सहित गोविंददेवजी मंदिर गए थे। पीछे से चोर मकान के ताले तोड़कर 2.40 लाख रुपए व सोने-चांदी के आभूषण चुरा ले गए थे। गिरोह को पकड़ने के लिए वैशाली नगर एसीपी आलोक सैनी के नेतृत्व में पुलिस टीम लगाई।

पुलिस की नजर में आया तो हिस्ट्रीशीटर ने जगह बदली

एसीपी आलोक सैनी ने बताया कि सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व तकनीकी आधार पर किशनलाल बैरवा के गिरोह का सरगना होने का पता चला। आरोपी करणी विहार थाने का हिस्ट्रीशीटर है। वह करीब चार वर्ष पहले गिरधारीपुरा में परिवार सहित रहता था। पुलिस की निगरानी बढ़ने पर आरोपी मकान बेचकर भीलवाड़ा चला गया। भीलवाड़ा में कई वारदातें अंजाम देने के बाद वापस जयपुर आकर नकबजनी करता रहा।

कार को एस्कोर्ट करती बाइक, गांव में बनाया मकान

पुलिस पूछताछ में किशनलाल ने बताया कि कई मकानों में चोरी के दौरान मोटा माल मिलने पर उसने गैंग में अपने बेटे व दामाद को भी शामिल कर लिया। आरोपी वारदात अंजाम देने के लिए कार से आते थे। लेकिन पुलिस नाकाबंदी और गश्त पर नजर रखने के लिए कार को बाइक से एस्कोर्ट करते थे। जिससे जिस मार्ग पर पुलिस हो तो बचने के लिए पहले ही रास्ता बदल लें। सरगना ने नकबजनी में मिले रुपयों से दो कारें खरीदी और गांव में मकान भी बना लिया।

असली व आर्टिफिशियल ज्वैलरी की पहचान

किशनलाल ने बताया कि गैंग में भागचंद को इसलिए रखा है कि नकबजनी के दौरान घर में मिलने वाले जेवर को देखकर वह तत्काल बता देता है कि ज्वैलरी असली है या फिर आर्टिफिशियल।