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युवा ही नहीं बच्चे भी हो रहे फैटी लिवर का शिकार, यह ह्रदय रोग से भी ज्यादा खतरनाक

तला-भुना खाने की आदत और बिगड़ी जीवनशैली बना रही बीमार, लापरवाही ज्यादा नुकसानदायक

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युवा ही नहीं बच्चे भी हो रहे फैटी लिवर का शिकार, यह ह्रदय रोग से भी ज्यादा खतरनाक

देवेंद्र सिंह राठौड़

जयपुर. अगर आप सोच रहे हैं कि शराब पीने वालों को ही लिवर की बीमारी होती है तो यह आपकी गहतफहमी है। कारण कि शराब पीने वाले एक तिहाई लोग ही लिवर की समस्या से ग्रस्त हैं, बाकी लोग मोटापा, असंतुलित खान-पान, डायबिटीज, हार्ट, अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल, थायराइड, हार्ट व किडनी समेत अन्य बीमारियों के चलते भी लिवर सिरोसिस व नॉन एल्कोहलिक लिवर संबंधी बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।

सवाई मानसिंह अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक की गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में लगातार ऐसे केस देखे जा रहे हैं। विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि ओपीडी में आने वाला हर दसवां व्यक्ति फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहा है। खासकर हेपेटाइटिस बी और सी होने का शुरुआत में पता नहीं चलता। जब तक जानकारी होती है यह बीमारी गंभीर रुप ले चुकी होती है। यह बीमारी मूलत: जीवन शैली से जुड़ी हुई है। इसलिए युवा ही नहीं अब तो बच्चे भी फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें आठ से 14 साल आयु तक के ज्यादा बच्चे शामिल है। जंक फूड व फास्ट फूड के अलावा घरों में चटपटे, मीठे व्यंजन का सेवन ज्यादा होने से इनका मोटापा बढ़ गया। इसके अलावा इनकी फीजिकल एक्टिविटी में कमी आना भी बड़ा कारण है। कोरोना काल के बाद इस बीमारी के मरीज 15 फीसदी तक मरीज बढ़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह ह्रदय रोग से भी ज्यादा खतरनाक है।

गंभीर स्थिति में पाए जा रहे मरीज

फैटी लिवर के मरीजों में 30 तक बच्चे व युवा शामिल हैं। अगर 100 मरीजों की एब्डोमेन अल्ट्रासाउंड जांच करवाते हैं तो, उनमें दस से ज्यादा मरीजों में फैटी लिवर मिलता है। जिनमें दो से तीन प्रतिशत मरीज गंभीर परेशानी से जूझ रहे होते हैं।


रोजाना करें 45 मिनट कसरत


हर समय थकान, पेट में दायीं ओर दर्द व सूजन इस समस्या के लक्षण हैं। यह नॉन-एल्कोहलिक लिवर डिजीज हो सकती है। समय रहते इस पर काबू नहीं पाए जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इससे बचाव के लिए कार्बोहाइड्रेट और वसा रहित व कम वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। रोजाना 45 मिनट कसरत जरूर करें।


यह बरतें सावधानी
-वजन और आहार नियंत्रित रखें
-कार्बोहाइड्रेट व वसा रहित कम वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवनए
-मांसाहारी भोजन न लें

-एल्कोहल का सेवन न करें

ऐसे लगा सकते हैं बीमारी का पता

एसएमएस अस्पताल के गेस्ट्रो विशेषज्ञ डॉ.हेमेन्द्र भारद्वाज के अनुसार शुरुआत में फैटी लिवर का पता लग जाए तो गंभीरता से बचा जा सकता है। एसजीपीटी टेस्ट में यह पुरुषों में 25 से ज्यादा व महिलाओं में 14 से ज्यादा हो जाए तो खतरनाक है। इसके बढऩ़े का कारण पेट के दाहिनी ओर भारीपन महसूस होना, गैस बनना, पेट खराब रहना व अपच आदि दिक्कत होती है। अन्य टेस्ट पेट की सोनोग्राफी, लिवर फंक्शन टेस्ट, ब्लड शुगर एवं कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच कराकर पता कर सकते हैं।