
Jaipur News : राजधानी की बालिकाएं रूढि़वादिता की बेडि़यां तोड़कर अपने सपनों की उड़ान भर रही हैं। शिक्षा के साथ ही देश-विदेश में खेलों में परचम लहरा रही हैं। बेटियां अब बोझ नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां निभा रही हैं। कच्ची बस्तियों की बालिकाओं ने संसाधनों की कमी होते हुए भी अपने हुनर, जज्बे और आत्मविश्वास के साथ सपनों को साकार किया।
जवाहर नगर कच्ची बस्ती में ऐसी कई बालिकाएं हैं। राजस्थान पत्रिका ने राष्ट्रीय बालिका दिवस पर कुछ बालिकाओं से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य अंधेरी दुनिया से अपने परिवार को निकालकर बेहतर जिंदगी देना है। साथ ही खेल में अपना कॅरियर बनाएंगे और देश के लिए स्वर्ण पदक लाएंगे।
अब पिता भी कहने लगे..बेटियों ने किया नाम रोशन
जवाहर नगर निवासी 18 वर्षीय रेणु कुमावत तीन वर्ष से ताइक्वांडो और जूडो खेल रही हैं। वह 11वीं कक्षा में पढ़ रही है। रेणु का परिवार एक छोटे से कमरे में किराए से रहता है। रेणु ने बताया कि वे पांच बहन-और एक भाई है। उनके पिता पंचर ठीक करने का काम करते हैं। जिससे घर का खर्चा चलना बहुत मुश्किल होता है। बस्ती में एक एनजीओ की स्कूल से पढऩा शुरू किया। वर्ष 2020 से ताइक्वांडो और जूडो खेलना शुरू किया। कोच को लगा की मैं अच्छा खेल रही हूं तो उन्होंने जिला स्तरीय टूर्नामेंट में भेजा और वहां से स्वर्ण पदक जीता। उसके बाद राज्य स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में कांस्य पदक और राष्ट्रीय स्तर पर मयथाई में रजत पदक जीता। आगे खेल को ही अपना कॅरियर बनाना चाहती हैं। पिताजी अब कहते हैं कि बेटियों ने नाम रोशन किया है।
पूरी बस्ती से मिल रहा सम्मान
जवाहर नगर निवासी 19 वर्षीय मुस्कान वर्मा भी तीन वर्षों से बॉक्सिंग और मयथाई खेल रही है। मुस्कान के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। वह 8 वीं कक्षा में पढ़ रही हैं। उसके परिवार में लड़कियों को पढ़ाना जरूरी नहीं समझा जाता था इसी कारण वह स्कूल में जल्दी दाखिला नहीं ले पायी। मुस्कान के पिता ई-रिक्शा चलाते हैं। मुस्कान ने जब खेलना शुरू किया तो घर वालों का समर्थन नहीं मिला, लेकिन अपनी मेहनत से आज पूरी बस्ती उसका सम्मान करती हैं। मुस्कान ने 2020 से लेकर 2022 तक लगातार राज्य स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। वर्ष 2023 में जिला और राष्ट्र स्तर पर मयथाई खेल में स्वर्ण पदक जीता। 2023 में तुर्की में हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मयथाई में कांस्य पदक जीता।
मयथार्ई में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय
जवाहर नगर निवासी 17 वर्षीय मनीषा तीन वर्ष से बॉक्सिंग और मयथाई खेल रही हैं। मनीषा का भाई बॉक्सिंग करता था तो बचपन से उसमें खेलने का जज्बा था, लेकिन कभी उसे अपने हुनर को दिखाने का अवसर नहीं मिला। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण भाई ने खेल छोड़ दिया। बस्ती में नि:शुल्क बॉक्सिंग सिखा रहे एक कोच से मनीषा ने प्रैक्टिस शुरू की। मनीषा ने जिला स्तर पर बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक और राष्ट्रीय स्तर पर मयथाई में स्वर्ण पदक जीते हैं। वर्ष 2023 में तुर्की में हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मयथाई में स्वर्ण पदक जीतने वाली वे पहली भारतीय बनी है।
Published on:
24 Jan 2024 10:41 am
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