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जयपुर की 35 कॉलोनियों तक पहुंचेगा बीसलपुर का मीठा पानी, खर्च होंगे 29 करोड़ रुपए

Jaipur City की करीब 35 कॉलोनियों को अब बीसलपुर का मीठा पानी मिलेगा। जलदाय विभाग ने 28 करोड़ 85 लाख रुपए की लागत से करीब 130 किलोमीटर की पाइप लाइन और पानी की टंकी आदि बनाकर इन कॉलोनियों में रहने वाली 50 हजार से अधिक की आबादी को बीसलपुर का पानी पिलाने की कवायद शुरू कर दी है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Jul 09, 2022

जयपुर की 35 कॉलोनियों तक पहुंचेगा बीसलपुर का मीठा पानी, खर्च होंगे 29 करोड़ रुपए

जयपुर की 35 कॉलोनियों तक पहुंचेगा बीसलपुर का मीठा पानी, खर्च होंगे 29 करोड़ रुपए

Jaipur City की करीब 35 कॉलोनियों को अब बीसलपुर का मीठा पानी मिलेगा। जलदाय विभाग ने 28 करोड़ 85 लाख रुपए की लागत से करीब 130 किलोमीटर की पाइप लाइन और पानी की टंकी आदि बनाकर इन कॉलोनियों में रहने वाली 50 हजार से अधिक की आबादी को बीसलपुर का पानी पिलाने की कवायद शुरू कर दी है। एसीएस जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी सुबोध अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई राजस्थान वाटर सप्लाई एवं सीवरेज मैनेजमेंट बोर्ड (आरडब्ल्यूएसएसएमबी) की वित्त समिति की बैठक में इसकी निविदा को मंजूरी दी गई।

अग्रवाल ने बताया कि शहरी जल योजना के तहत हरमाड़ा और बढ़ारना सहित सीकर रोड क्षेत्र की करीब 30 से 35 कॉलोनियां इस परियोजना से लाभांवित होंगी। 1966 में बनी हरमाड़ा योजना के तहत इस क्षेत्र के गांवों को पानी मिल रहा था। वर्ष 2015 में यह क्षेत्र शहरी जल प्रदाय योजना के अंतर्गत आ गया और इसके बाद 2016 से यहां बीसलपुर का पानी तो आ गया, लेकिन पाइपलाइन नहीं होने के कारण ज्यादातर कॉलोनियों में बीसलपुर का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस योजना में बढ़ारना मोक्षधाम क्षेत्र और रीको परिसर में पानी की टंकी बनाई जाएगी। साथ ही मनसा माता मंदिर के पास स्वच्छ जलाशय बनेगा और क्षेत्र में 130 किलोमीटर लंबी पाइप लाइनें डाली जाएंगी, जो करीब 30-35 कॉलोनियों में रहने वाले 55 हजार लोगों का गला बीसलपुर के मीठे पानी से तर करेंगी।

स्काडा सिस्टम से जुडे़गी नई पेयजल योजनाएं

जयपुर शहर की नई पेयजल योजनाएं मुख्य स्काडा सिस्टम से जोड़ी जाएंगी। इसके लिए 2 करोड़ 17 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी गई है। इसमें आमेर पेयजल योजना, पृथ्वीराज नगर, जामडोली, जगतपुरा और खोनागोरियान पेयजल योजनाएं जयपुर के मुख्य स्काडा सिस्टम से जोड़ी जाएंगी। इससे पानी के प्रेशर एवं फ्लो की माॅनिटरिंग के साथ ही आॅडिट करने में भी आसानी होगी। इन सभी पेयजल योजनाओं का डाटा सेंट्रल माॅनिटरिंग सिस्टम पर उपलब्ध होगा।