
तेजी से बढ़ रहा दायराः पांच दशक में शहर ने दिखाया 40 गुना दम, संसाधन पड़ रहे कम
जयपुर. राजधानी जयपुर का विस्तार साल दर साल बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि वर्ष 1971 में जयपुर महज 76 वर्ग किमी में था। आज तीन हजार वर्ग किमी तक पहुंच चुका है। पिछले एक दशक में शहर का दायरा तीन गुना बढ़ गया है। जबकि 51 साल में यह विस्तार 40 गुना तक हुआ है। जिस तरह से शहर का दायरा बढ़ रहा है, उस हिसाब से शहर में शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में सरकार ने काम नहीं किया। कहीं पानी की किल्लत है तो कहीं लोगों को सड़कों का इंतजार है। चिकित्सकीय सुविधाओं के लिए लोग सवाई मानसिंह अस्पताल पर निर्भर हैं। सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने पर सरकार का ध्यान नहीं है। मेट्रो ट्रेन का दायरा भी सीमित होकर रह गया है। ऐसे में लोगों के कई घंटे बसें बदलने में ही निकल जाते हैं। जबकि, जयपुर देश के तेजी से बढ़ते शहरों में शुमार है।
शहर बढ़ रहा, समस्याएं नहीं सुलझ रहीं
-पानी, बिजली, सीवर, ड्रेनेज व अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी देखने को मिल रही है। जेडीए खुद अपनी आवासीय योजनाओं को भी विकसित नहीं कर पा रहा है।
-दूर दराज इलाकों में जाकर लोग रहने लगे। इन लोगों को शहर आने-जाने में मुसीबत झेलनी पड़ती है। सार्वजनिक परिवहन लचर होने की वजह लोग परेशान हैं।
-हजारों लोग निजी वाहनों से डीजल-पेट्रोल की खपत होती है। वायु प्रदूषण बढ़ता है और लोग घंटों जाम में भी फंसते हैं।
नहीं सुधरे तो ये दिक्कत होना तयएक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 तक जयपुर शहर की आबादी 75 लाख तक पहुंच जाएगी। ऐसे में सुविधाएं नहीं बढ़ीं तो दिक्कत होना तय है। जानकारों के अनुसार राजधानी में 6 लाख से अधिक आवासों की जरूरत है।
इनको मजबूत करना जरूरी
सार्वजनिक परिवहन: अभी शहर में जेसीटीएसएल की 300 बसों का ही संचालन हो रहा है। जबकि, आबादी और बढ़ते शहर के अनुसार 2500 बसें होनी चाहिए। 300 बसों में से भी सौ बसें अगले वर्ष मार्च तक बेड़े से बाहर हो जाएंगी। ऐसे में सड़क पर केवल 200 बसें ही बचेंगी। एक हजार बसें आने के बाद भी पूरे शहर के लिए पर्याप्त संख्या में बसें नहीं मिल पाएंगी।चिकित्सा: तेजी से बढ़ते शहर में नए अस्पतालों को विकसित करना होगा। ताकि लोगों को घर के आस-पास ही अच्छा इलाज मिल सके। जेडीए ने टोंक रोड, अजमेर रोड, आगरा रोड और दिल्ली रोड पर जगह तो दी है, लेकिन वहां पर चिकित्सकीय सुविधाएं विकसित करने में अभी आठ से दस वर्ष लग जाएंगे।
पेयजल: राज्य सरकार पृथ्वीराज नगर के लोगों के लिए 747 करोड़ रुपए से पेयजल सिस्टम विकसित कर रही है। इसके विकसित होने पर शहर के बाहरी हिस्से में रहने वाले लोगों को भी लाभ होगा। जो तंत्र विकसित किया जा रहा है, वह वर्ष 2054 की आबादी को देखते हुए हो रहा है।
आंकड़ों में बढ़ रहा शहर
-800 वर्ग किलोमीटर है दोनों नगर निगम का दायरा
-3000 वर्ग किलोमीटर है जेडीए परिधि क्षेत्र
-76 वर्ग किलोमीटर एरिया था पहले मास्टर प्लान में
-3000 वर्ग किलोमीटर एरिया हो गया मौजूदा मास्टर प्लान में
अभी तीन हजार वर्ग किमी जेडीए का क्षेत्रफल है। इसमें काफी जगह खाली है। उन हिस्सों को विकसित करने की जरूरत है। नए मास्टरप्लान में दायरा बढऩे की संभावना कम है। अभी 725 गांव शामिल हैं। मूलभूत जरूरतें बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए।
-एचएस संचेती, पूर्व मुख्य नगर नियोजक
ये योजनाएं बदलेंगी सूरत
चौंप में क्रिकेट स्टेडियम: दिल्ली रोड स्थित चौंप में क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य चल रहा है। अगले दो वर्ष में इसका काम पूरा होना है। दर्शकों के लिहाज से यह स्टेडियम विश्व में तीसरे स्थान पर होगा। इसके आस-पास भी विकास कार्य तेजी से होंगे।
मेट्रो फेज-2: मेट्रो ट्रेन के फेज 2 पर केंद्र और राज्य सरकार में विवाद है। यदि दोनों सरकारें आपसी तालमेल से मेट्रो विस्तार पर काम करें तो शहरवासियों का काफी लाभ मिल सकता है। राज्य सरकार बजट न होने की वजह से इस प्रोजेक्ट को धरातल पर नहीं उतार पा रही है।
Published on:
07 Nov 2022 12:01 pm
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