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‘जागती ज्योत’ के नाम से प्रसिद्ध है बालाजी, जले 2100 घी के दीपक

कार्तिक शुक्ल चतुर्दशीयुक्त पूर्णिमा पर गुरुवार को बैकुंठ चतुर्दशी (Baikuntha Chaturdashi) मनाई गई। शहर के मंदिरों में विशेष झांकियां सजाई गई, शाम को दीपदान किया गया। जयपुर के कुलदेवता श्रीघाट के बालाजी (Ghat ke Balaji) में दीपदान व महाआरती की गई। घाट के बालाजी 'जागती ज्योत' के नाम से प्रसिद्ध है।

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'जागती ज्योत' के नाम से प्रसिद्ध है बालाजी, जले 2100 घी के दीपक

'जागती ज्योत' के नाम से प्रसिद्ध है बालाजी, जले 2100 घी के दीपक

'जागती ज्योत' के नाम से प्रसिद्ध है बालाजी, जले 2100 घी के दीपक

— घाट के बालाजी के 2100 दीपकों से महाआरती, दीपदान

जयपुर। कार्तिक शुक्ल चतुर्दशीयुक्त पूर्णिमा पर गुरुवार को बैकुंठ चतुर्दशी (Baikuntha Chaturdashi) मनाई गई। शहर के मंदिरों में विशेष झांकियां सजाई गई, शाम को दीपदान किया गया। जयपुर के कुलदेवता श्रीघाट के बालाजी (Ghat ke Balaji) में दीपदान व महाआरती की गई। घाट के बालाजी 'जागती ज्योत' के नाम से प्रसिद्ध है।

श्रीघाट के बालाजी में महंत स्वामी सुरेश कुमार सुदर्शनाचार्य के सानिध्य में मां महालक्ष्मी व विष्णु भगवान के निमित्त 2100 घी के दीपक जलाकर दीपदान किया गया। इस मौके पर भक्तों ने महाआरती की। वहीं भगवान का नारायण संकीर्तन व हनुमान चालिका के पाठ किए गए। साथ में स्त्रोत व पाठ भी हुए। महंत स्वामी सुरेश कुमार सुदर्शनाचार्य ने बताया की कार्तिक माह में भक्त घाट के बालाजी के दर्शन कर पुण्य लाभ लेते हैं। घाट के बालाजी 'जागती ज्योत' के नाम से प्रसिद्ध है। यहां कार्तिक मास में बैकुंठ चतुर्दशी पर दीपदान का विशेष महत्व है।