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‘जयपुर के धोरें’ में मिल रही जीवाश्मों की जानकारी

नाहरगढ की तलहटी में विद्याधर नगर स्थित किशनबाग (Kishanbagh) में विकसित किए गए मरूस्थलीय पार्क (desert park) अद्वितीय है। यहां लोगों को राजधानी में 'जयपुर के धोरे' देखने के साथ रेगिस्तानी रेत के सिलिका से बनी राजस्थानी चट्टानों व वनस्पति की जानकारी भी दी जा रही है। वहीं जीवों के जीवाश्मों से संबंधित जानकारी (information about fossils) भी यहां दी जा रही है। विद्यार्थियों को कई जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

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'जयपुर के धोरें' में मिल रही जीवाश्मों की जानकारी

'जयपुर के धोरें' में मिल रही जीवाश्मों की जानकारी

'जयपुर के धोरें' में मिल रही जीवाश्मों की जानकारी
— अद्वितीय है किशनबाग में विकसित मरूस्थलीय पार्क
— सौगात मिलते ही बाग देखने के लिए उमड़ रही भीड़

जयपुर। नाहरगढ की तलहटी में विद्याधर नगर स्थित किशनबाग (Kishanbagh) में विकसित किए गए मरूस्थलीय पार्क (desert park) अद्वितीय है। यहां लोगों को राजधानी में 'जयपुर के धोरे' देखने के साथ रेगिस्तानी रेत के सिलिका से बनी राजस्थानी चट्टानों व वनस्पति की जानकारी भी दी जा रही है। वहीं जीवों के जीवाश्मों से संबंधित जानकारी (information about fossils) भी यहां दी जा रही है। विद्यार्थियों को कई जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए इस बाग में गाइड लगाए गए है, जो लोगों को यहां की खुबियों के साथ राजस्थानी पेड़—पौधों व वनस्पतियों के बारे में बता रहे है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक दिन पहले ही इस बाग की जयपुरवासियों को सौगात दी है। जेडीए के वन संरक्षक महेश तिवाड़ी ने बताया कि किशन बाग परियोजना के तहत अरावली एवं मरूस्थल क्षेत्र में पाये जाने वाले पेड़—पौधोें और घास की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा 7 हजार से अधिक रेगिस्तानी वनस्पतियों की जानकारी भी लोगों को दी जा रही है। रेगिस्तानी रेत के सिलिका से बनी ऐतिहासिक चट्टानों के अलावा जीवों के जीवाश्मों से संबंधित जानकारी भी दी जा रही है। विद्यार्थियों को कई जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए बाग में दो गाइड लगा रखे है, जो आधा—आधा घंटे के एक राउंड में लोगों को राजस्थानी वनस्पति और चट्टानों की जानकारी उपलब्ध करा रहे है।

उद्देश्य जीव—जन्तुओं के प्राकृतिक वास को संधारित करना...
जेडीए के वन संरक्षक महेश तिवाड़ी ने बताया कि किशनबाग परियोजना को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य नाहरगढ़ के रेतीले टीलों को स्थाई कर यहां पाये जाने वाले जीव जन्तुओ के प्राकृतिक वास को सुरक्षित कर संधारित करना है। राजस्थान में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के बलुआ चट्टानों के बनने के बारे में जानकारी देना है। राजस्थान की विषम परिस्थितियों (जैसे बलुआ एवं ग्रेनाईट की चट्टानों तथा आद्र भूमि) में उगने वाले पौधो को मौके पर माईक्रो क्लस्टर के रूप में विकसित कर साईनेज के माध्यम से वैज्ञानिक एवं शिक्षकीय अभिरूचि पैदा करना है।

बाग में ये है प्रमुख राजस्थानी वनस्पति
खैर, रोंज, कुमठा, अकोल, धोंक, खेजडी, इंद्रोक, हिंगोट, ढाक, कैर, गूंदा, लसोडा, बर्ना, गूलर, फालसा, रोहिडा, दूधी, खेजडी, चूरैल, पीपल, जाल, अडूसा, बुई, वज्रदंती, आंवल, थोर, फोग, सिनाय, खींप, फ्रास आदि प्रजाति के पेड-पौधे है। वहीं लापडा, लाम्प, धामण, चिंकी, मकडो, डाब, करड, सेवण आदि प्रजाति की घास है।

सौगात मिलते ही देखने पहुंचे लोग...
किशनबाग में विकसित किए गए मरूस्थलीय पार्क की सौगात मिलते ही लोग देखने के लिए उमड़े। पहले दिन करीब 117 लोगों ने यह बाग देखा। जयपुर के धोरे देख लोग जहां खुश नजर आए, वहीं राजस्थानी वनस्पति, राजस्थानी चट्टानों के अलावा जीवाश्मों की जानकारी मिली।