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शहर में 20 दिन से हो रहे चीनी के करवे तैयार

प्रेम, त्याग और विश्वास का पर्व करवा चौथ (Karva Chauth) कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर गुरुवार को मनाया जाएगा। करवा चौथ व्रत को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है। बाजार में करवा चौथ को लेकर रौनक है। चीनी के करवों (Sugar Karva) के साथ मिट्टी के करवों की बिक्री हो रही है। हालांकि इस बार चीनी के करवे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। वहीं कारीगर भी चीनी के करवे तैयार (Preparing Sugar Karva) करने मंे दिन- रात जुटे हुए हैं।

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शहर में 20 दिन से हो रहे चीनी के करवे तैयार

शहर में 20 दिन से हो रहे चीनी के करवे तैयार

5 लाख चीनी के करवे पूजा के लिए तैयार
- शहर में 20 दिन से हो रहे चीनी के करवे तैयार
- परकोटे में चीनी के करवे तैयार करने में जुटे कारीगर

जयपुर। प्रेम, त्याग और विश्वास का पर्व करवा चौथ (Karva Chauth) कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर गुरुवार को मनाया जाएगा। करवा चौथ व्रत को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है। बाजार में करवा चौथ को लेकर रौनक है। चीनी के करवों (Sugar Karva) के साथ मिट्टी के करवों की बिक्री हो रही है। हालांकि इस बार चीनी के करवे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। वहीं कारीगर भी चीनी के करवे तैयार (Preparing Sugar Karva in Parkota) करने मंे दिन- रात जुटे हुए हैं।

राजधानी के बाजारों में करवा चौथ की खरीददारों की रौनक देखते ही बन रही है। दुकानों के साथ सडक़ पर भी करवे बिक रहे हैं। परकोटे के साथ बाहरी बाजारों में दुकानों पर करवों की बिक्री जोरों पर है। करवा चौथ पर पूजन के लिए शहर में करीब 5 लाख चीनी के करवे तैयार हो चुके हैं, इसके अलावा मिट्टी के करवे भी खूब बिक रहे हैं। हालांकि मिट्टी की जगह अब महिलाएं चीनी के करवे ज्यादा पसंद कर रही है।

शहर में छोटी चौपड़ के पास नाटाणियों की मोरी के अलावा त्रिपोलिया बाजार में हनुमानजी का रास्ता और सूरजपोल बाजार में हिदा की मोरी में चीनी के करवे तैयार हो रहे हैं। यहां भट्टियों पर रोजाना करीब 15 से 20 हजार चीनी के करवे तैयार हो रहे हैं। चीनी के करवे बनाने वाले कजोड़मल शर्मा ने बताया कि इस बार करवा चौथ के लिए शहर में करीब 5 लाख चीनी के करवे तैयार किए गए हैं। कारीगर नवरात्र से ही चीनी के करवे बनाने में जुटे हुए हैं। एक भट्टी पर एक दिन में करीब 3 हजार करवे तैयार किए जा रहे हैं। जयपुर के साथ ये करवे आस-पास के कस्बों और गांवों में भी जा रहे हैं। चीनी के करवे तैयार करने वालों की मानें तो इन करवों का चलन पिछले 10 से 15 साल से हुआ है। पिछले 5 सालों में इनका चलन बढ़ा हैं। शहर में छोटी चौपड़, किशनपोल बाजार, हनुमानजी का रास्ता, बड़ी चौपड़ के अलावा कई जगहों पर चीनी के करवे बिक रहे हैं। बाहरी बाजारों और कॉलोनियों में भी चीनी के करवों की बिक्री परवान पर है।

मिट्टी के करवों का महत्त

भले ही मिट्टी के करवों की जगह अब चीनी के करवों ने ले ली हो, लेकिन मिट्टी के करवे भी शहर में बिक रहे हैं। सडक़ों के साथ कुछ मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर ये करवे बिक रहे हैं। कुछ महिलाएं अभी भी मिट्टी के करवों से चौथ माता की पूजा-अर्चना करती है। ज्योतिषाचार्य रवि शर्मा ने बताया कि करवा चौथ दो शब्दों से मिलकर बना है, करवा यानि कि मिट्टी का बर्तन और चौथ यानि गणेशजी की प्रिय तिथि चतुर्थी। प्रेम, त्याग व विश्वास के इस अनोखे महापर्व पर मिट्टी के बर्तन यानि करवे की पूजा का विशेष महत्व है, महिलाएं चौथ माता की पूजा में करवे का उपयोग करने के अलावा रात को चंद्रदेव को जल अर्पण भी करवे से ही करती है।


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