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महाराजा सवाई जयसिंह II जयंती विशेष: 12 साल की उम्र में ही राजगद्दी पर बैठ गए थे जयपुर के संस्थापक, रोचक है कहानी-ज़रूर पढ़ें

Maharaja Sawai Jai Singh Birthday: वर्ष 1700 में जयसिंह को 12 साल की उम्र में राजगद्दी पर बैठा दिया गया।

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जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह की 330 वीं जयंती प्रदेश भर में मनाई जा रही है। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के ज़रिये उन्हें याद किया जा रहा है। सवाई जयसिंह द्वितीय का जन्म 3 नवम्बर 1688 को हुआ था। उन्हें 18वीं सदी में भारत में राजस्थान प्रान्त और आमेर राज्य के सबसे प्रतापी शासक के तौर पर माना जाता था।


सन 1727 में आमेर से दक्षिण छः मील दूर एक बेहद सुन्दर, सुव्यवस्थित, सुविधापूर्ण और शिल्पशास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर नए शहर 'सवाई जयनगर' को बसाने वाले नगर-नियोजक के तौर पर पहचाना जाता है। 'सवाई जयनगर' को ही बाद में जयपुर के नाम से प्रसिद्धि मिली।


रोचक है राजगद्दी तक का सफर

दरअसल, हुआ यूं कि वर्ष 1700 में आमेर नरेश विष्णु सिंह की काबुल में मृत्यु होने के बाद उनके पुत्र जयसिंह को 12 साल की उम्र में राजगद्दी पर बैठा दिया गया। पदभार ग्रहण करने के बाद सामंतों और मंत्रियों की सलाह से जयसिंह कछवाहा सेना को लेकर औरंगजेब से मिलने औरंगाबाद की एक दरगाह में पहुंचे। जयसिंह ने दोनों हाथ उठाकर औरंगजेब को सलाम किया।


बादशाह ने जयसिंह को पास बुलाया और सलाम के लिए उठे दोनों हाथों को कसकर पकड़ लिया। झूंठा गुस्सा दिखते हुए बादशाह ने कहा 'बोल... जयसिंह तू अब हाथ छुड़ाने के लिए क्या करेगा। इस पर जयसिंह ने कहा ..बादशाह सलामत मुझे तो लगता है कि आज से मेरी तकदीर बदल गई है। सुनते हैं कि बादशाह जिसका एक हाथ पकड़ ले तो वह सर्वोपरि हो जाता है। आपने तो मेरे दोनों हाथ पकड़े हैं। अब तो मैं आपका सबसे ज्यादा अजीज हो गया हूं।


जयसिंह का जवाब सुन बादशाह खुश हो गए। उन्होंने जयसिंह के हाथ छोड़ दिए और शाही फरमान में लिखा कि आमेर के मिर्जा राजा मानसिंह के वंश में जयसिंह उनसे भी सवाया है। औरंगजेब ने जयसिंह को आमेर का राजा बनाने पर मुहर लगाई।

जयपुर फाउंडेशन के संस्थापक सियाशरण लश्करी के अनुसार बादशाह ने कहा कि जयसिंह उम्र से तो बालवय है, लेकिन इसकी बुद्धि और स्वभाव समझदार बुजुर्ग जैसा है। इसलिए अब यह सवाई जयसिंह के नाम से जाना जाएगा। सवाई का अलंकरण देने के बाद औरंगजेब ने सवाई जयसिंह को दो हजारी जात का राजा और दो हजार सैनिक सवारों का मनसब दिया और खेलना का दुर्ग जीतने के लिए भेजा। जयसिंह ने 14 सेनाओं के साथ खेलना के शक्तिशाली दुर्ग को पांच दिन के युद्ध में विजय कर लिया।


इतिहासकार हनुमान शर्मा ने लिखा कि औरंगजेब ने जयसिंह के दोनों हाथ पकड़ लिए तब जयसिंह ने बादशाह को कहा, जब एक हाथ पकड़ी औरत जीवन भर साथ निभाती है, तो आपने तो मेरे दोनों हाथों को पकड़ कर मेरे भाग्य को बदल दिया है। बाद में बादशाह फर्खुशियर ने सवाई जयसिंह को महाराजाधिराज का सम्मान दिया। सवाई का खिताब मिलने के बाद कछवाहा राज्य के चौकोर पंचरंगा झंडे को भी सवाया झंडा कर दिया।

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