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लहंगे-ओढ़नी व साड़ियों का ‘संसार’, बढ़ा दिया तीन गुना ‘बाजार’

Jaipur Lalji Sand Ka Rasta: शादी—ब्याह के लिए साड़ियां खरीदनी हो या फिर दुल्हन के लिए लहंगे—ओढ़नी व शादी का जोड़ा, हर महिला लालजी सांड का रास्ता का ही रुख करती है।

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लहंगे-ओढ़नी व साड़ियों का 'संसार', बढ़ा दिया तीन गुना 'बाजार'

लहंगे-ओढ़नी व साड़ियों का 'संसार', बढ़ा दिया तीन गुना 'बाजार'

जयपुर। शादी—ब्याह के लिए साड़ियां खरीदनी हो या फिर दुल्हन के लिए लहंगे—ओढ़नी व शादी का जोड़ा, हर महिला लालजी सांड का रास्ता का ही रुख करती है। बाजार में दिनभर महिलाओं की भीड़ देखकर तो यही लगता है। लेटेट्स डिजायन और हर रेंज के लहंगे—ओढ़नी और साड़ियों की यह एक 'मंडी' है। व्यापारियों की मानें तो यहां प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर से ग्राहक आते हैं। ग्राहकी के चलते पिछले एक से दो दशक में ही बाजार में तीन गुना दुकानें बढ़ गई है। अब बाजार में साड़ियों व लहंगे—चुन्नी, दुल्हन के बेस के बड़े—बड़े शॉरूम भी बन गए।

लालजी सांड का रास्ता परकोटे के चौड़ा रास्ता का प्रमुख बाजार है। करीब आधा किलोमीटर के इस बाजार में 150 से अधिक दुकानें साड़ियां और लहंगे—ओढ़नी की है, जहां सुबह से रात तक महिलाओं की भीड़ नजर आती है। शादी—ब्याह के सीजन में बाजार में भीड़ बढ़ जाती है। परकोटे का एक यह ऐसा बाजार है, जहां दिनभर महिलाओं की आवाजाही रहती है। इस बाजार में 125 रुपए से लेकर 30 हजार रुपए तक की साड़ी उपब्लध है। वहीं एक हजार रुपए से लेकर 80 हजार से भी अधिक की कीमत के लहंगे—ओढ़नी बाजार में बिक रहे है। बाजार में प्रवेश करने के साथ ही साड़ियों और लहंगे—ओढ़नी से दुल्हन जैसी सजी दुकानें नजर आएगी।

बाजार में खास
दुल्हन के परिधान, बेस, लहंगे—ओढ़नी, साड़ी, सूट, जींस टॉप और मॉर्डन लुक के महिला परिधान के अलावा बच्चों के कपड़े इस बाजार में उपलब्ध है।
महिलाओं का अधिक आवागमन होने से इस बाजार में हैण्डबैग, चूडियां, जूतियां, सेण्डल, घडियां और सौन्दर्य प्रसाधनों की दुकाने भी है।

जैन मंदिर और प्राचीन कुुंआ
बाजार में दो प्रसिद्ध जैन मंदिर है, इसके अलावा यहां एक प्राचीन कुंआ है, जो जयपुर के हैरिटेज को जीवंत करता नजर आता है। इसके अलावा बाजार में पुरानी हवेलियां है।

मोहनथाल की महक
बाजार में प्रवेश करते ही मोहनथाल की महक आती है। यहां प्रसिद्ध सौंध्या हलवाई की दुकान है, जहां मोहनथाल खरीदने वालों की भीड़ नजर आती है। आज भी यह दुकानें अपनी उसी स्वरूप में है और यहां का मोहनथाल देश—दुनियां के लोगों को भा रहा है। इसके साथ ही यहां गन्ने के रस की दुकान पर भी महिलाओं की भीड़ नजर आती है।

लालजी के नाम पर पड़ा रास्ते का नाम
जयपुर फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष सियाशरण लश्करी बताते हैं कि पूर्व महाराजा माधोसिंह ने दरबार की पड़दायत के लड़के लालजी को यहां हवेली दी थी और उन्हें यहां बसाया। शरीर में वे मोटे थे, ऐसे में इस जगह का नाम लालजी सांड का रास्ता पड़ गया। वे कहते है कि आज से 40 साल पहले यहां कुछ नहीं था, लेकिन अब बड़ी—बड़ी दुकानें हो गई।

हर तरह की साड़ियां बाजार में उपलब्ध
लालजी सांड का रास्ता व्यापार मंडल अध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता का कहना है कि दुल्हन के परिधान के साथ हर तरह की साड़ियां बाजार में उपलब्ध है। यहां रोजाना 5 से 6 हजार महिलाएं खरीददारी करने आती है। शादी—ब्याह के सीजन पर 10 से 15 हजार महिलाएं रोजाना बाजार में खरीददारी के लिए आती है। बाजार में लगातार कारोबार बढ़ता जा रहा है। यहां महिलाओं को सौन्दर्य प्रसाधन के हर आयटम मिल जाते है। बाजार में महिलाओं के लिए शौचालय बन जाए तो बड़ा काम हो।

महिलाओं की पहली पसंद लालजी सांड का रास्ता
लालजी सांड का रास्ता व्यापार मंडल महामंत्री चन्द्र प्रकाश राणा का कहना है कि शादी—ब्याह में लेने—देने की साड़ियां खरीदनी हो या फिर दुल्हन के लिए बेस, अधिकतर की पहली पसंद लालजी सांड का रास्ता होता है। यहां बिना मोल—भाव के एकदाम की दुकानें है। जयपुर के साथ आस—पास के गांव—कस्बों के अलावा देशभर से महिलाएं यहां साड़ियां, दुल्हन के बेस आदि खरीदने आती है। बाजार में महिला सुरक्षा को लेकर सरकार को कदम बढ़ाने चाहिए। यहां नियमित महिला गार्ड या महिला पुलिसकर्मी तैनात किए जाए।

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