
JLF 2019 : गुलजार की जुबानी, उनके गानों के पीछे की कहानी
जया शर्मा / जयपुर. 'पहले रिद्म बनती है, फिर उसमें गीत सजते हैं। हर गीत की अपनी कहानी, मूड और इमोशंस होते हैं। एक-एक शब्द को चुना जाता है और फिर वो सजता है। हर गाने के पीछे एक कहानी छिपी होती है।' यह कहना है गीतकार गुलजार का। वे कहते हैं 'मैं गीतों में तुकबंदी को जगह नहीं देता, क्योंकि आपको पीछे मुड़कर भी अपना लिखा सुनना होता है और शब्दों के कोने-खुदरे भी खुद को सुधारने पड़ते हैं। बात उर्दू की करें तो उसका अपना लहजा और साउंड होता है। गीतों में उर्दू शब्दों का भी खूब इस्तेमाल होता है।' गुलजार की इन बातों और उनके गीतों से फ्रंटलॉन की सुबह गुलजार हो उठी। उन्होंने अपने बेहतरीन चार गानों की कहानियों को बयां किया।
उनके साथ नसरीन मुन्नी कबीर ने इन गानों को मर्म के साथ इंग्लिश में ट्रांसलेट किया है। सेशन को मॉडरेट संजॉय के रॉय ने किया। सेशन में नसरीन मुन्नी कबीर की बुक 'जिया जले: स्टोरीज बिहाइंड द सॉन्ग्स' पर चर्चा हुई। नसरीन ने कहा कि गुलजार साहब ने अपने गानों को मुझे बहुत अच्छी से समझाया है, इसकी वजह से ही मैं गानों के मर्म को बरकरार रख पाई। गुलजार कहते हैं 'जो लोग कुछ भी लिखकर नीचे मेरा नाम लगा देते हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर चलाते हैं। उन्हें शर्म आनी चाहिए। मुझे उन पर अफसोस होता है।'
'बीड़ी जलाई ले...'
गुलजार- 'जब बीड़ी जलाई ले...' लिखा, तो बीड़ी की जगह दूसरे शब्द पर चर्चा हुई, सबसे पहले दिमाग में आया 'उपला'। फिर अंगीठी और चूल्हा भी सोचा लेकिन इनके साथ सिगरेट भी यहां नहीं बैठा। फिर मैंने सॉन्ग की पंच लाइनों के पहले एक मुखड़ा दे दिया, जो इस तरह था 'ना गिलाफ, ना लिहाफ ठंडी हवा भी खिलाफ, ससुरी इत्ती सर्दी है किसी का लिहाफ लई ले जा पड़ोसी के चूल्हे से आग लई ले।' कहानी के अनुसार इसके बाद 'जब बीड़ी जलाई ले...' पंच लाइन फिट बैठी।
'चल छैया छैया छैया...'
गुलजार- 'चल छैया छैया...' जिसमें छैया-छैया शब्द फोक और भजनों से लिया है। खासकर कृष्ण के भजनों में छैया शब्द का इस्तेमाल होता आया है। इमसें 'वो यार है जो खुशबू की तरह, जिसकी ज़ुबां उर्दू की तरह...' के जरिए सूफियाना अंदाज दिया गया है और 'गुलपोश कभी इतराए नहीं, महके तो नजऱ आ जाये कहीं...' के पीछे एक फूल की खूबसूरती को बयां किया है, जैसे कोई फूल की तरह की है और महकती है, तो नजर आ जाती है।
'जीया जले जा जले...'
गुलजार- ज्यादातर लोग इस गाने को सुनकर यह नहीं समझ पाते कि यह गाना सुहागरात पर लिखा गया है। गाने के बोल 'अंग अंग में जलती हैं दर्द की चिंगारियां, मसले फूलों की महक में तितलियों की क्यारियां', जो सुहागरात का बयां करते हैं। इस संबंध में कालीदास से सिखना चाहिए, जो शब्दों में पूरा जिस्म खड़ा कर देते थे, लेकिन कहीं गंदगी महसूस नहीं होती थी। यहीं तो भारतीय क्लासिकल कविताओं की खास बात होती है।
जय हो जय हो...
गुलजार- इस गाने में शब्दों का चुनाव और इसका इंग्लिश में ट्रांसलेशन बहुत ही उम्दा है। 'आजा आजा जिंद शामियाने के तले, आजा जरी वाले नीले आसमान के तले...' में आसमान को जरी के जैसा सुनहरा बताया गया है। 'रत्ती रत्ती सच्ची मैंने जान गंवाई है, नच-नच कोयलों पे रात बिताई है, अंखियों की नींद मैंने फूंकों से उड़ा दी' इसमें अंखियों की नींद मुहावरा है, जिसमें फूंकों से उड़ा को जोड़ा है। गाना कहानी का मर्म हैं, जो एक संघर्ष को दिखाता है। इस गाने में रहमान और सुखविन्दर ने जान डाल दी।
Published on:
25 Jan 2019 07:22 pm
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